संगठन जरूरी है मजबूरी नहीं: विक्रम गोस्वामी
संघे शक्ति कलियुगे ! (अर्थात कलियुग में संगठन शक्ति ही प्रमुख है) ये श्लोक अपने अनेकों बार पढ़ा या सुना होगा. संगठन की शक्ति को जानने के लिए हमें अपने धर्म ग्रंथो को पढ़ना व सुनना चाहिए. ऐसा नहीं है की संगठन की शक्ति का महत्व केवल कलयुग मे ही है सत्युग,त्रेतायुग,द्वापरयुग मे संगठन का अपना विशेष महत्व रहा है सत्युग मे देव दानव युद्ध,त्रेतायुग मे श्री राम का रावण से युद्ध, द्वापरयुग मे कुरुक्षेत्र का युद्ध, हर युग मे सत्य ओर संगठन की विजय होती रही है और इस कलियुग मे भी सच्चाई के मार्ग पर चलने वाले संगठनों की जरूरत है. आम तौर पर देखा जाता है जब लोग संगठित होते है तो कई बार सत्य की रह छोड़ देतें है ओर कुछ समय बाद फैला हो जाते है कार्य की सफलता केवल सत्य के रह पर मिल सकती है वो भी संगठनात्मक दृष्टि से ही संभव होगी. जागो ओर संगठित रहो. जो कायर थे वो धर्म बदल चुके है हमारें पुरखे वीर थे जिन्होनें धर्म के सम्मान मे बलिदान दे दिया पर धर्म नहीं बदला पीठ पर घात करने वाले गद्दारों को संगठित हो कर सबक सिखाया. हिन्दुओं को बाट कर हराया जा सकता है संगठि...