कांवड़ यात्रा सनातन धर्म की एक अत्यंत पवित्र परंपरा है, जिसमें लाखों शिवभक्त देशभर से गंगाजल लाकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा भक्ति, तपस्या और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन हाल के वर्षों में इस पवित्र यात्रा के दौरान कुछ ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने सनातन समाज को चिंता में डाल दिया है। विश्व हिंदू महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कालका पीठ के पीठाधीश्वर महंत सुरेन्द्र नाथ अवधूत जी ने इस पर गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि “अगर किसी को हिन्दू धर्म में आस्था ही नहीं है, तो फिर हमारे देवी-देवताओं के नाम पर दुकान क्यों?” "क्यों कुछ लोग अपनी असली पहचान छिपाकर 'शिवा ढाबा', 'हनुमान रेस्टोरेंट', 'श्रीराम होटल' जैसे नामों से व्यापार कर रहे हैं?" अगर नीयत साफ है, तो अपने वास्तविक नाम से दुकान क्यों नहीं खोली जाती? क्या यह केवल व्यापार बढ़ाने की चाल है, या इसके पीछे कोई गहरी साजिश हैं उन्होंने कहा कि दुकानों से हमें आपत्ति नहीं है, लेकिन "झूठे नामों से, भक्तों को धोखे में रखकर व्यापार करना गलत है। यह धार्मि...
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