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Showing posts from February, 2022

सरकार पुजारियो ओर मोलवियों में फर्क कर रही है:विक्रम गोस्वामी

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दुनिया इस वक्त कोरोना के कहर से जूझ रही है ओर यह महामारी वैश्विक तोर पर फैल रही है ऐसे में लोगो में डर का माहौल है वही एक ओर  देश मेंं जहाँ एक तरफ कोविड़ 19 ने  जिस कदर कहर ढाया है उसका मुख्य कारण मरकज से निकले हज़ारो जमातियों का कोरोना को देेेश भर में लाने फैलाने के प्रकरण से देश मे अलग माहौल बना हुआ है वही मन्दिरो से हाल ही में सोना लेने की बात को लेकर हिन्दुओ के धर्मगुरु ओर हिन्दुओ के संगठन नाराज है इसी बात को लेकर सनातन हिन्दू युवा वाहिनी दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष विक्रम गोस्वामी ने  कहा कि हिन्दुओ को ही हमेशा ही टारगेट किया जाता रहा मंदिरो से सोना मांगने की बात हो या कुछ और मुद्दा यह हमेशा चलता रहा है  पर पुजारियों और मौलवियों मे सरकार फर्क डाल रही है वह सरासर गलत है जब मौलवियों को तनख्वाह दी जा सकती है तो पुजारियों  को क्यू नही  उनके साथ सौतेला रवैया किस लिए....सरकार दोनों को दो अलग अलग चश्में से देखती है इन दिनो सभी मंदिर बंद थे दिल्ली मे हर कॉलोनी मे दो या चार मंदिर है उनमें पूजा करने वाले पुजारी और उनके परिवार पर सुध लेने वाला कोई नही है ल...

"भारतीय जनता पार्टी का इतिहास"

21अक्टूबर 1951 में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना  की। 1952 में पहली बार देश मे आम चुनाव हुए। इस चुनाव में जनसंघ ने भी हिस्सा लिया और तीन सीटें जीतीं। इस जीत के बाद भारतीय जनसंघ राष्ट्रीय पार्टी के रूप में उभर कर सामने आई।  देश के पहले लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस ने 364 सीटें जीत कर बहुमत प्राप्त कर लिया. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 सीटें जीत कर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई। आचार्य नरेंद्र देव, जयप्रकाश नारायण और डॉ. राम मनोहर लोहिया के नेतृत्व वाली सोशलिस्ट पार्टी को 12 सीट, आचार्य जेबी कृपलानी के नेतृत्व वाली किसान मजदूर प्रजा पार्टी को 9 सीट, हिंदू महासभा को 4 सीट, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ को केवल 3 सीट से संतोष करना पड़ा। रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी को भी 3 सीट मिली। बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की शिड्यूल कास्ट फेडरेशन को 2 सीटें मिलीं. 23 जून 1953 को जम्मू के जेल मे ड्रा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की रहस्यमय ढंग से मृत्यु हो गई 1954 मे मौलि चन्द्र शर्मा को  भारतीय जनसंघ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।  सन 1957 के दूसरे लोकस...

"दिल्ली का राजनैतिक इतिहास"

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भारत की आजादी के बाद देश मे राजनैतिक सरगर्मी बढ़ गई थी. आजादी के बाद दिल्ली को पार्ट-सी स्टेट का दर्जा दिया गया था। दिल्ली मे लम्बे समय तक नगरपालिका प्रशासन मे रही।   वो ही सरकार की भूमिका मे थी। चीफ कमीशनर इसके सर्वेसर्वा होते थे। नगरपालिका के अन्तर्गत 7 मार्च 1952 मे दिल्ली विधानसभा निर्वाचित हुई। मंत्रिपरिषद का नेतृत्व चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने किया।  इस तरह चौधरी ब्रह्म प्रकाश दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री हुए। ब्रह्म प्रकाश दिल्ली के शकूरपुर गावं के निवासी थे। उस समय विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या 48 थी।  सन 1955 मे दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप मे गुरुमुख निहाल सिह को नियुक्त किया गया। एक साल बाद ही दिल्ली की विधानसभा की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया और नवंबर 1956 मे दिल्ली को पावर सी स्टेट का दर्जा मिल गया।  जिससे दिल्ली राष्ट्रपति के शासन के दायरे मे आ गई। और फिर राज्य पुनर्गठन की सिफारिशे आना शुरू हुई। सन 1957 मे म्यूनिसिपिल एक्ट बनाया गया।  इसके आने के बाद दिल्ली मे मेट्रोपोलिटन काउंसिल बनी और लम्बे समय तक दिल्ली इस मेट्रोपोलिटन काउंस...