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Showing posts from 2021

आप भी बन सकते हो धनवान

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आप भी बन सकते हो धनवान  मानव जब से सभ्य हुआ अर्थात यूँ कहें कि वह जब से कबीलाई समाज से पृथक हो कर समाज में सामुहिक रूप से रहने लगा तब से उसके जीवन में अर्थ का अर्थात धन का महत्व किसी न किसी दृष्टि से बना हुआ है. तमाम कारणों मे से एक प्रमुख कारण अर्थ भी है जो समाज में वर्ग संघर्ष का कारण बना हुआ है और आज की स्वीकृत सामाजिक मान्यता के अनुसार धन ही आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा तय कर रही है.  तो फिर हम भी अमीर कैसे बन सकते हैं आइए इस पर विचार करे.  हम सब अपने जीवन में कुछ न कुछ कार्य करते हैं और पैसा कमाते हैं जिस से की हमारा जीवन बेहतर चले और हमारे परिवार का भी. जिसमें से अधिकतर लोग अधिक पैसा कमाने की नहीं सोचते ब्लकि अधिक से अधिक पैसा बचाने की सोचते हैं और यहीं अपने मूल उद्येश्य से भटक जाते हैं. हमे पैसे बचाने से अधिक कमाने के विषय में सोचना चाहिए क्यु की हम जानते हैं कि तालाब अपना पानी बचा कर रखता है आगे नहीं जाने देता परंतु समय के साथ वह खराब हो जाता परंतु नदी अपनी पानी नहीं रोकती वह अपने प्रवाह को बनाए रखती है फिर भी उसका पानी साफ़ भी रहता है इसका यही कारण है कि नद...

बिन बाल्मीकि अधूरा सा है सनातन......

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भारत वर्ष का इतिहास महर्षियों का इतिहास है जिसमें महर्षि वाल्मीकि है, वेद व्यास हैं, संत रविदास हैं और ऐसे नामों की लंबी सूची है. जब कि हम यह जानते हैं कि सनातन का अर्थ होता है - जिसका आदि और अंत न हो अर्थात जो अनंत हो जिसका शुरूवात भी न मालूम हो और अंत भी न मालूम हो तो स्वभाविक है कि ऐसे धर्म में महर्षि वाल्मीकि से पहले भी ऋषि हुए होंगे और बाद में भी. फिर भी कुछ विशेष अर्थों में देखा जाए तो महर्षि वाल्मीकि के बगैर सनातन अधूरा सा प्रतीत होता है. एक तो महर्षि वाल्मीकि आदिकवि है दूसरा उन्होंने अध्यात्म रामायण की रचना की चुकी इस देश में और भी बहुत रामायण लिखा गया है जैसे - तमिल भाषा में कंबन, उड़िया मे विलंका, कन्नड मे पंप और अवधि में रामचरितमानस फिर भी महर्षि वाल्मीकि का विशेष महत्व इस अर्थ में है कि उन्होंने सबसे पहले राम कथा की रचना की और शेष सभी राम कथाओं पर उनके राम कथा का प्रभाव देखा गया है. यदि वाल्मिकी कृत रामायण नहीं होता तो देश में आज किसी भी भाषा में कोई भी राम कथा नहीं होती. यहां यह भी ध्यान रखना होगा कि पूरे विश्व में महर्षि वाल्मीकि कृत अध्यात्म रामायण और गोस्वाम...

आप क्या हैं? आप की संगत बताती है

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आप क्या हैं आप की संगत बताती है. भक्ति आंदोलन के परिणाम स्वरुप जन्मे रहीम ने कभी कहा था कि..... "संगत से गुण होत है संगत से गुण जात" अर्थात, आप के अंदर कैसे गुण है या आप कैसे गुण सीख रहे हैं ये आप की संगत तय करती है यदि आपकी संगत अच्छी है तो आपके गुण भी अच्छे हैं और संगत अच्छी नहीं है तो गुण भी अच्छे नहीं है. कहते हैं कि आपका गुण कैसा है ये आपकी संगत (अर्थात दोस्त) बताती है और आपकी हैसियत क्या है ये आपके दुश्मन बताते हैं यहां भी यह विचारणीय है कि हैसियत बेशक दुश्मन बताए पर गुण तो संगत से ही तय होगी. आईए दो महाकाव्यों अर्थात रामायण और महाभारत से से दो प्रबल उदाहरण लेते हैं.  दुर्योधन का संग कर्ण को प्राप्त था और राम का संग विभीषण को प्राप्त था परंतु इतिहास साक्षी है कि कर्ण जैसा सात्विक पुरुष दुर्योधन के संगत में आकर धर्म और अधर्म मे अन्तर नहीं कर सका और अधर्म की ओर से युद्ध किया परंतु वही विभीषण जो कि रावन के साम्राज्य मे रहा परन्तु राम का संगत पा कर धर्म  करते हुए धर्म की ओर से युद्ध किया और ये चरम उदाहरण है संगत से गुण होने का और नहीं होने का.  संगत में गुण ...

बेरोजगारी का मूल कारण

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मानव समाज का इतिहास समस्याओं का इतिहास है मनुष्य अपने जीवन के शुरुआती काल से ही समस्याओं से टकराते आ रहा है और एक सच्चाई यह भी है कि समस्या मनुष्य के जीवन में नहीं बल्कि हर एक जीव को है जो पृथ्वी पर पल बढ़ रहा है उसके जीवन मे समस्या निरंतर बनी हुई है. पर मनुष्य के जीवन में आज की समस्या रोटी कपड़ा और मकान की नहीं है, है भी तो आंशिक तौर पर फिर आज की बड़ी समस्या क्या है जिस से हम सब ही नहीं ब्लकि हमारी और आपकी आने वाली संततिया भी जुझेगी. मैं अपने समान्य समझ से कहूँगा की आज की बड़ी समस्या है बेतहाशा जनसंख्या वृद्धि ज्यादा बेहतर यह होगा कि इसे जनसंख्या वृद्धि नहीं ब्लकि जनसंख्या विस्फोट कहा जाए और विस्फोट मैं विस्फोट शब्द का प्रयोग इस लिए भी कर रहा हूं क्यु भारत मे प्रति वर्ष जनसंख्या वृद्धि दर 2010 से लेकर 2019 के बीच 1.2 फीसदी बटाया गया जो इतने विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए खतरनाक है.  यह समझने वाली बात है कि हमारे पास संसाधन सीमित है और जनसंख्या असीमित हमारे पास रेल्वे ट्रैक, रोड, रोजगार, नौकरी और प्राकृतिक संसाधन सब कुछ सीमित है पर जनसंख्या असीमित.  इसक...

जाति से बड़ा है धर्म

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हम भारतीय लोग स्वभाव से धार्मिक लोग है हमारे हर कार्य में धर्म की भूमिका होती ही होती है चाहे हम सुबह सबसे पहले नींद से जगे तो धरती पर पैर रखने से पूर्व हम धरती मंत्र का जाप करते हैं खाना खाने से पूर्व हम ईश्वर की स्तुति करते हैं यात्रा करने से पूर्व भी हम धार्मिक विधि विधान से यह विचार करते हैं कि किस दिन को किस दिशा में यात्रा की जाए और किस दिशा में न कि जाए किस दिन को किस दिशा के लिए दिशाशूल है और किस दिन को नहीं है. जिस समाज के जीवन में धर्म की इतनी बेहतरीन भूमिका है आखिर वो समाज जाती के दंशकारी बंधनों में जकड़ा कैसे आखिर ऐसा क्या हुआ कि धर्म के आधर पर जन्मी जाती आज धर्म से बड़ी हो गई है. भगवान श्री कृष्ण गीता मे कहते हैं..... चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः। तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम् ।। अर्थात, अपने अपने गुणों और कर्मों के द्वारा ही हमने इस समाज को चार वर्णों के आधर पर बांटा है. मूल बात तो यह हो गई कि हमारे यहां समाज का विभाजन चार वर्ण के आधार पर किया गया. जिसमें जो ज्ञानी हुआ जिसे समाज, धर्म, राजनीति, शिक्षा, व्याकरण, ज्योतिष इत्यादि विषयों की सम...

सम्वेदनाहीन राजनीति - न अपनी न पराई

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मानव सभ्यता के इतिहास में मानव का जितना अपने जरूरतों से सम्बंध रहा है उतना ही राजनीति से भी चाहे तो उसका स्वरुप हर दौर और हर दशक में अलग अलग ही क्यु न हो, मनुष्य जब से सभ्य हुआ और सामाजिक रूप से संगठित हुआ तब से उसका प्रयास एक ऐसी व्यवस्था विकसित करने की रही है जो उसके समाज का संचालन करता रहे और उसके भलाई के लिए नीति से लेकर नियम बनता रहे उसको एक ऐसी नीति की आवश्यकता पडी जो समान्य जनमानुष पर राज करे और यहीं से जन्म होता है राजनीति का. पर प्रश्न उठाता है कि राजनीति का स्वरुप कैसा होना चाहिए ? उसको कितना शाश्वत और कितना सम्वेदनशील होना चाहिए ? यह कहना भी उचित है कि राजनीति कठोरता की मांग करती है और परंतु कठोरता संवेदनहीनता का पर्याय तो नहीं और कठोरता और संवेदनहीनता मे कितना अन्तर है यह कौन निश्चित करेगा. क्या यह सच नहीं है कि आज राजनीतिक रूप से हम इतने सम्वेदनहीन हो गए हैं कि हम हर रोज अखबार में मरती  हुई जिंदगियों की ख़बरें पढ़ते हैं और आगे बढ़ जाते हैं हमे इस बात से कोई फर्क़ ही नहीं पड़ता कि खेलने के उम्र में किसी बेटी की बलात्कार हो गई हमे इस से भी कोई फर्क़ नहीं पड़त...

कृष्णनीति सफलता का मूलमंत्र

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*कृष्णनीति सफलता का मूलमंत्र*  जीवन में आने वाले सभी सुख और दुख हमारी नीतियों पर आधारित है जैसी हमारी नीति होती है वैसा ही उसका परिणाम भी होता है। किसी भी कार्य को सफल करने के लिए एक अच्छी नीति की आवश्यकता होती है। नीतियां हम अपने आदर्शों को देखकर व उनसे सीख कर बनाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति सफल होना तो चाहता है परन्तु उसकी गलत नीतियों सफलता मे बाधक होती है। दुनिया की सर्वश्रेष्ठ नीति भगवान श्री कृष्ण की नीति है श्री कृष्ण का समूचा जीवन मे धर्म युद्ध चलता रहा अधर्म के विरुद्ध महाभारत श्री कृष्ण का अंतिम युद्ध था। जब सत्य पर असत्य हावी होने लगे तो हमें श्री कृष्ण नीति के अनुसार ही निर्णय लेना चाहिए।  *कृष्णनीति:*    *1.मत की स्पष्टता।*  भगवान श्री कृष्ण के संधि संदेश को जब दुर्योधन ने ठुकरा दिया तो भगवान कृष्ण कर्ण को समझाते हैं परंतु कर्ण का मत स्पष्ट था वह युद्ध दुर्योधन की ओर से ही करेगा। किस संवाद के उपरांत जब भगवान कृष्ण पांडवों के पास जाते हैं तो उनको  उनका साथ देने वाले मित्र राजाओं और शत्रु राजाओं के बारे में विस्तार पूर्वक बताते हैं। स्पष्ट...

संन्यासी आन्दोलन

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सन्यासी आंदोलन  धूल चढ़ी इतिहास की पुस्तकों में दफन है एक ऐसा आंदोलन जिस के विषय मे लोगों को अधिक नहीं बताया गया। अंग्रेजों  की दमनकारी नीतियों के चलते शांत स्वभाव के सन्यासियों को भी विद्रोह का मार्ग अपनाना पड़ा। जब अंग्रेजों ने हिंदुओं को उनके तीर्थ स्थानों पर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था।  सन 1763-1800ई में गिरी संप्रदाय के सन्यासियों व नागा सन्यासियों द्वारा एक आंदोलन चलाया गया। ये सभी संन्यासी आदि गुरु शंकराचार्य के अनुयायि थे। इस आंदोलन में किसानों व शिल्पकारों ने भी भाग लिया। ये सभी संन्यासी शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता थे इनका मुख्य काम धर्म का प्रचार प्रसार व पठन पाठन व शस्त्रों का परीक्षण देना होता था। मठ मन्दिरों की देख रेख व पूरी व्यवस्था इन्हीं के हाथ मे होती थी। जीवित रहते हुए स्वयं का पिंडदान कर अपने आप को धर्म के प्रति समर्पित कर धर्म युद्ध मे अग्रणी भूमिका मे रहते थे। ये वेह योद्धा थे जिन्होने इस आंदोलन से पूर्व भी मराठाओ व राजपूतों के साथ मिल कर विदेशी आक्रांताओं से जंग लडी है। सन् 1763 से 1773 तक ये सन्यासी विद्रोह बहुत मजबूत स्थिति मे आ चुका ...

कल्कि अवतार की प्रतीक्षा कर रहे है सप्तचिरंजीव।

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भगवान विष्णु के दसवे अवतार का कई हजारों वर्षों से इंतजार हो रहा है। भगवान श्री हरी विष्णु कल्कि रूप में अवतार लेंगे ऐसा सनातन धर्म की पुस्तकों में वर्णित है। सात दिव्य महापुरुष भगवान कल्कि अवतार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। येॐ है। किसी न किसी कारणवश यह सप्त चिरंजीवी  भूमंडल का भ्रमण कर रहे हैं।dरररररररररररररररररररररररररररतररररररररररररररररतरररतरररररररररररररररररररररररतररररतररररररररररररररररररररररररररररतरररररररररररऱशॐद्यद्यक्ष सप्त चिरंजीवी : अश्वत्थामा : महाभारत में गुरु द्रोण के पुत्र। ऐसी कथा प्रचलित है कि गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा के सिर में अमर मणि है। अश्वत्थामा को कृष्ण के श्राप के कारण ही चिरंजीवी होना पड़ा था, वे कलयुग के अंत तक रहेंगे।  बQलि : महाराज बलि जो पाताल लोक के स्वामी हैं, जिन्होंने भगवान वामन को तीन पग भूमि के वचन में सारी सृष्टि दान कर दी थी। zzzzz घमंड को खत्म करने के लिए उसे कलयुग के अंत तक रहेंगे। xa  व्यास : भगवान वेद व्यास जी विष्णु भगवान के अवतार, जिन्होंaaaaaaने अठारह पुराण, महाभारत, वेदों के विभाजन xआदि रचे। इन्हें अमरता का वरदा...

विदेशी घुसपैठियों पर सरकार का रवैया सुस्त क्यों?

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विदेशी घुसपैठियों पर सरकार का रवैया सुस्त क्यों? वो लोग जो इजरायल और फिलिस्तीन पर ज्ञान दे रहे है। वो सभी  लोग रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों पर मौन क्यों हो जाते है क्या उनको दिखना बन्द हो गया है। हमारे संसाधनों पर उनका कब्जा हो रहा है। देश के संसाधनों पर भारत के लोगो का अधिकार है। देश की स्थिति व परिस्थिति किसी से छिपी नहीं है भारत की आबादी के अनुसार भारत में सीमित संसाधन है। पर जो भी संसाधन भारत जुटा पाया है  उन सभी पर भारत के नागरिकों का पहला अधिकार होना चाहिए परंतु देखा जाता है कि जो रोहिंग्या और बांग्लादेशी लोग भारत में आ बसे हैं उनको भी भारत में उसी तर्ज पर महत्व दिया जाता है जैसे कि भारत के मूल निवासियों को दिया जाता है।   भारत एक विकासशील देश है। इसी विकास के लिए देश के नागरिक टैक्स भरते हैं  टेक्स के द्वारा ही भारत की उन जरूरतों को पूरा किया जाता है जिससे कि भारत के प्रत्येक नागरिक को जरूरी सुविधाएं दी जा सके। जैसे की स्वास्थ्य, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर परंतु इन सुविधाओं पर उन विदेशी लोगों का कोई अधिकार नहीं है जो लोग गैरकानूनी तरीके से...

फिलीस्तीन और इजरायल के बीच खूनी संघर्ष जारी है।

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फिलीस्तीन और इजरायल के बीच खूनी संघर्ष जारी है। यह दोनों ही देश एक लंबे समय से जंग के साए में जी रहे हैं पूरी दुनिया इन दोनों देशों को टकटकी लगाए देख रही है। भीषण बमबारी के चलते आसमान हुए से पटा हुआ है। यहूदी और इस्लाम में बहुत ही समानता होने के बावजूद यह युद्ध धर्म के आधार पर लड़ा जा रहा है। इस जंग का मूल कारण 35 एकड़ का भूभाग है  जिस पर यहूदी, मुस्लिम और ईसाई अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहते हैं। यह स्थान यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम धर्म के लिए बेहद पवित्र स्थान है। यहूदियों के अनुसार ये एक पवित्र सुलैमानी मन्दिर था, जिसकी मात्र एक  दीवार बची है। यही मूसा ने यहूदियों को यहूदी धर्म की शिक्षा दे थी। ईसाई मत अनुसार यही शहर ईसा मसीह की कर्मभूमि रही है। इस्लाम के अनुसार इस ही स्थान से हजरत मुहम्मद बुर्राक़ पर सवार होकर जन्नत की सैर पर गए थे।  इतिहास का अध्ययन करने के बाद पता चलता है। विवाद के तार इतिहास से जुड़े हैं इस विवाद को समझने के लिए इतिहास को जानना बेहद जरूरी है अगर हम बात करते हैं यहूदी धर्म की तो यहूदी धर्म का उदय ईसा से लगभग 2000 साल पहले हुआ था। इस...

"कौन है ये खोसे"

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अधिकांश लोगो के लिए ये नाम नया है  पुराने दौर में जब भी कोई राजा किसी राज्य पर हमला करता था तो सबसे आगे अफवाह फैलाने वाले जाते, उनके पीछे कुछ गुप्तचर। इसके कुछ किलोमीटर पीछे सैनिक होती। इसमें भी सबसे आगे कुछ घुड़सवार, फिर नाचने गाने वाले, ढोल, ताशे पीटने वाले और फिर मुख्य सैन्यदल। मुख्य दल में राजा बीच मे होता था सेनापति, सेना, राजा को सुरक्षित रखते थे तोपख़ाना,मज़दूर, रसोईदल, सफाई दल, हकीम, वैद्य वग़ैरह। इस सभी को राजा द्वारा पग़ार दी जाती थी।  परन्तु फौज के आख़िर में एक टोली और भी चलती थी। इनको न पैसा मिलता और न कोई मेहनताना, लेकिन ये साए की तरह हर सेना से थोड़ी दूरी बनाकर चलते और हर जगह युद्ध की ख़बर सूंघते हुए पहुंच जाते थे। मध्य एशिया में इनको ख़ोस या कफनखसोट कहा जाता था। इनका काम जंग के उपरांत, हारा दल मैदान से भाग जाता या बंदी बना लिया जाता। जीता हुआ दल राजधानी और संसाधनों पर क़ब्ज़ा करने आगे बढ़ जाता। विजेता शवों को वहीं दफ्न कर जाते, दाह-संस्कार कर जाते या ऐसे ही छोड़कर भी आगे बढ़ जाते। यहां से ख़ोसों का काम शुरू होता। ख़ोसे लाशों के शरीर पर मौजूद कवच और अं...

"मंजिल अब दूर नही है"

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"मंजिल अब दूर नही है" मन मे कर दृढ़ विश्वास चलो, अपनों को ले कर साथ चलो।। शूल बिछे पथ पर चलना है, रव पर कर विश्वास चलो।। धूप छाव बरखा रोकेगी, बन अर्जुन गांडीव लिए साथ चलो। पग पग पर दुनिया टोकेगी, बन नीर नदी का बहते चलो।। देख ली जिसने राह मंजिल की, अब उसकी मंजिल दूर नही है ॥ आलस की छोड़ बिछौनि, परिश्रम पथ पर बढ़े चलो॥ मान अपमान के तोड़ो बंधन, सब का कर सम्मान चलो॥ कुत्ते भौके तो क्या होगा,  बन मदमस्त हाथी बढ़े चलो॥ राह है लम्बी है घनघोर अंधेरा, दीप ज्ञान का सुलगाए चलो॥  कोयला हीरा बन जाता है,   संघर्ष की ज्वाला जलाए चलो॥                    (Vikram Goswami)

माना है घनघोर अंधेरा,पर तू क्यों घबराता है।।

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माना है घनघोर अंधेरा, पर तू क्यों घबराता है।। अमर नही है जग मे कोई, जो जन्मा है वो एक दिन जाता है॥ तू तो है एक कटपुतली प्यारे, डुगडुगी जीवन की विधाता ही बजाता है॥ कर्म करना है काम तेरा बस, फल के लालच मे क्यों फस जाता है॥ तुझको नही विश्वास राम पर, इसलिए कष्टों मे तू घिर जाता है॥ माना है घनघोर अंधेरा, पर तू क्यों घबराता है।। जो होना है वो हो कर ही रहेगा,  फिर क्यो चिंता के सागर मे फंसता जाता है॥ जो मुठि बांधे आता है,  वो हाथ पसारे जाता है॥ जो जानी नही है साथ तेरे, ऐसी दौलत पर तू क्यों इतराता है॥ जो लिखी है तेरे खाते मे,  उसे छीन कोई कहा पाता है॥ साँस की गिनती तय है प्यारे, कोई अधिक नही ले पाता है॥ माना है घनघोर अंधेरा, पर तू क्यों घबराता है॥  जिनका है संबंध राम से, उसका बुरा कहा कोई कर पाता है॥  जो रखते है सदा धैर्य, सुखद जीवन वही पाता है॥ चीर अंधेरे की छाती को,  सूरज अम्बर मे छा जाता है॥ छोड़ दे वन्दे सब कुछ रव पर,  वही जन्म और मृत्यु का दाता है॥                          (विक्रम गोस्वामी)

गोस्वामी समाज का इतिहास

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गोस्वामी समाज केवल एक जाति नही बल्कि एक सम्प्रदाय है एक ऐसा पंथ जो सदैव से ही भगवान महादेव की आराधना को अपना प्रथम कर्तव्य मानते हुए सनातन धर्म का प्रचार प्रसार  करता है। अनादिकाल से शैव ब्रह्मणों का ये सम्प्रदाय पठन पाठन, योग व अनेकों प्रकार के शोध के कार्य मे व्यस्त रहता था।  कुछ जानकारों के अनुसार इस पंथ का उदय आदिगुरू शंकराचार्य जी के समय हुआ था। जबकि अगर गहनता से अध्यन करें तो पता चलता है ये पंथ अनादिकाल से भगवान महादेव की सेवा मे गणों के रूप मे विधमान है। समय समय पर स्वंय भगवान महादेव ने इस पंथ की पद भ्रष्ट होने व अपने कर्तव्य से विमुखता को रोकने के लिए गुरु दत्तात्रेय, आदि गुरु शंकराचार्य के रूप मे अवतार लिया। व शैव ब्रह्मणों को धर्म रक्षा के लिए प्रेरित किया। धर्मरक्षक सन्यासियों का ये सम्प्रदाय दो भाग मे विभाजित हो गया. गृहस्ती और सन्यासी जो साधु गृहस्त जीवन मे आ गए वह गृहस्थ जीवन मे भी अपनी परम्परा अपने उपनामों से जुड़े रहे। ऐसा नही है की सभी गोस्वामी शैव है वैष्णव सम्प्रदाय मे भी गोस्वामी होते है  आज हम केवल शैव ब्रह्मणों व दशनामी गोस्वामी पर चर्चा क...

कालकाजी मन्दिर दिल्ली

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कालकाजी मंदिर अरावली पर्वत श्रृंखला के सूर्यकूट पर्वत पर स्थित है इस मन्दिर को मनोकामना सिद्धपीठ मन्दिर भी कहा जाता है। माँ कालिका का ये मन्दिर देश के प्राचीनतम सिद्धपीठों में से एक है।  इस पीठ का अस्तित्व अनादि काल से है। मान्यता है कि इस ही स्थान पर आद्यशक्ति महाकाली के रूप में प्रकट हुई। और असुरों का संहार किया। माँ पार्वती ने कौशिकी देवी को प्रकट किया। जिन्होंने अनेक असुरों का संहार किया लेकिन रक्तबीज को नहीं मार सकीं। तब माँ पार्वती ने अपनी भृकुटी से महाकाली को प्रकट किया। जिन्होंने रक्तबीज का संहार किया। महाकाली का रूप देखकर सभी भयभीत हो गए। देवताओं ने माँ काली की स्तुति की तो माँ भगवती काली ने कहा जो भी इस स्थान पर श्रृद्धाभाव से पूजा करेगा, उसकी मनोकामना पूर्ण होगी। तब से ही यह मनोकामना सिद्धपीठ के रूप में विख्यात है।  एक कथा ये भी इस मन्दिर से जुड़ी है।  महाभारत काल में युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के साथ यहां भगवती महाकाली की अराधना की थी। मुख्य मंदिर में 12 द्वार हैं, जो 12 राशियों का संकेत देते हैं। वहीं परिक्रमा स्थल के...

"सभी समस्याओ का एक ही समाधान है श्रीमतभगवतगीता"

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जीवन मे हर व्यक्ति अपनी अपनी क्षमता अनुसार कार्य करता है और सफल होने का पूरा प्रयास करता है चंद लोग ही अपनी मंजिल पर पहुँच पाते है अधिकांश लोगो का जीवन संघर्षमय होता है।  हर कदम पर समस्या, हर कार्य मे कठनाई, लक्ष्य की प्राप्ति से पूर्व ही हार मान लेना ये सब के जीवन का हिस्सा बन गया है। जो समस्या आप के जीवन मे आज है उसका समाधान भगवान श्री कृष्ण ने करीब 5159 साल पहले कुरुक्षेत्र मे गीता के रूप मे दिया था जिसके कुल 18 अध्याय है।  उन सभी 18 अध्याय को वर्तमान की समस्याओं के समाधान के रूप मे समझते है। प्रथम अध्याय- *अर्जुनविषादयोग* (सेना का निरीक्षण) दुर्योधन ने अपने गुरु के पास जा कर कहा... हे आचार्य आपके बुद्धिमान शिष्य ध्रुपद पुत्र धृष्टद्युम्न के द्वारा व्यू  रचना से खड़ी हुई पांडवों की इस भारी भरकम सेना को देखिए। और सभी महारथियों का वर्णन किया। और उनकी तुलना मे अपने महापराक्रमी महारथियों के विषय मे बताया।  तत्पश्चात पितामाह भीष्म ने अपना गंगनाभ: शंख बजाया।  दूसरी और से श्रीकृष्ण ने अपना पाञ्चजन्य शंख बजाया। भगवान कृष्ण के शंखनाद के बाद सभी ने अपने अपन...

पाण्डवों की राजधानी इस आधुनिक युग मे दिल्ली के नाम से जानी जाती है

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इन्द्रप्रस्थ से ढिल्लिकापुरी और वर्तमान मे दिल्ली. अनेकों बार दिल्ली मे बहने वाली जमना खून से लाल हुई है इस दिल्ली ने कई युद्ध देखे है कई बार लूटी फिर बसी ये दिल्ली हर विदेशी आक्रांताओं के निशाने पर रही है दिल्ली जब हम दिल्ली के इतिहास को खंगालते है तो पता चलता है। जो हमें पढ़ाया जा रहा है उसमे केवल विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन किया जा रहा है। उनकी लूट को भारत पर महानता के नाम पर थोपा जा रहा है। दिल्ली के वास्तविक संस्थापक राजा अनंगपाल तोमर प्राथम थे (736-754 ई.) उनके योगदान व उनके चरित्र को छिपाया गया। अनंगपाल तोमर द्वितीय ने महरौली के विष्णु स्तंभ की स्थापना कराई। और कई मंदिरों का निर्माण कराया. जिनमें जैन मन्दिर भी शमिल थे। उनके द्वारा बनाए गए मंदिरों व महल का वर्णन आमिर खुसरो मे भी उल्लेख है। सभी मंदिरों को ध्वंस कर  कूतूबदीन ऐबक ने कुब्ब्तुल मस्जिद बनवाई थी। जिसे आज  कुतुब मीनार कहा जाता है वो भी एक मन्दिर ही था। अनंगपाल तोमर जी का इतिहास बड़ा शौर्यवान था। उनके द्वारा एक छोटी सी सुन्दर झील अनंगताल का निर्माण कराया। जो की फरीदाबाद के अनंगपुर गावं के पास स्थित ह...

"दोष चौपाई मे नही तुम्हरी सोच मे है"

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प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं।  मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥ ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥ रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड से ली गई ये चौपाई आप ने कई बार सुनी होगी। कुछ लोग सनातन धर्म के विभाजन की मनसा से अधूरे ज्ञान को ऐसे प्रस्तुत कर रहे है जैसे उनसे बड़ा ज्ञानी कोई इस धरा पर नही है।  ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥ इस अधूरी चौपाई को बड़े बड़े मंचों से उच्चारित किया जाता है। ऐसा भी  नही है की वे लोग इस का सही अर्थ नही जानते है। या फिर उनको पता नही है। परन्तु वे इसको अधूरा प्रस्तुत कर लोगो मे भेद(फूट) डालना चाहते है। कुछ लोग ताड़ना के स्थान पर प्रताड़ना बोलते है जो की पूरी तरहा से गलत है । ताड़ना व प्रताड़ना दोनो शब्दों के अर्थ अगल-अलग है! अगर हम इस चौपाई की बात करें तो  ऊपर की पंक्ति,  प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं।  मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥ इससे ये साफ स्पष्ट हो जाता है की अगली पंक्ति मे ताड़ना शब्द का अर्थ सीख देना है। आमतौर पर लोग चालाकी के लिए भी इस शब्द का इस्तमाल करते है। वह काम को जल्दी ताड़ लेता है। अर्था...

"आप की समस्या इस लिए बड़ी है क्योंकि आपने गीता नही पढ़ी है"

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हर एक व्यक्ति को लगता है ईश्वर ने दुनिया के सभी दुख उसके खाते मे लिख दिए है सभी को लगता है की उसकी समस्या दूसरों से काफी बड़ी है कभी कभी तो ईश्वर भी इनके द्वारा कोशा जाता है. सुख के अनुपात मे दुःख अधिक आता है. बहुत कुछ पा कर भी व्यक्ति निराश ही कालचक्र पूरा करके  चला जाता है. आमतौर पर आप और हम सुनते है। एक दूसरे को  संबोधित करते हुए. बस चल रहा है, समय काट रहे है, समस्या तो समस्या ही होती है पर उसके रूप अलग अलग है  कोई तन से, कोई मन से, कोई धन से दुःखी होता है किसी को पद प्रतिष्ठा चाहिए, किसी को मान सम्मान चाहिए, सभी के जीवन मे कुछ ना कुछ गठित हो रहा है जो उसको चिन्तित करता है चिंता का समय से निदान नही किया जाए तो वह बहुत विराट रूप ले लेती है  ऐसा ही परिस्थिति कुरुक्षेत्र मे महान धनुर्धर अर्जुन के सामने भी आई थी जब रणभूमि सज चुकी थी और अर्जुन सही निर्णय नही ले पा रहे थे और वो युद्ध के प्रारम्भ से पहले ही हार मान चुके थे. अर्जुन को हताश और निराश देख भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। ये वो समय था जब अर्जुन अपना आत्मविश्वास खो रहा था. परिवार के...

दलितों का शोषण दलित ही कर रहें है. विक्रम गोस्वामी

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कभी शूद्र क़हलाने वाले हमारे भाइयों को महात्मा गांधी जी ने  "हरिजन" का सम्बोधन दिया यानी हरि के जन , भगवान हरि के पुत्र, उनके उत्थान की बात करने वाले कुछ हरिजन नेताओ ने ही हरिजन शब्द को कही छुपा दिया और एक नया शब्द दिया "दलित" अथार्थ जो दला गया हो या शोषित हुआ हो, अब "दलित" शब्द से संबोधन किया जाता है उन मेहनतकश लोगों को जो केवल सेवा को अपना धर्म मानते रहें है उनको अलग अलग नाम से संबोधित किया जाता रहा है कुछ शब्द ऐसे भी है जो किसी गाली से कम नहीं है. पर इस सब के पीछे आखिर कौन है  जिसके कारण ये समाज पिछड़ता गया और आज भी विशेषआ अधिक (आरक्षण) होने के बावजूद पिछड़ता ही जा रहा है. कहीं ऐसा तो नहीं आरक्षण चंद लोगों की बपौती बन कर रह गया हो. उन लोगों तक ये विशेष अधिकार पहुंचा ही नहीं जिनको इस की वास्तविकता में  आवश्यकता थी ऐसा लगता है  कुछ लोगों ने आरक्षण के लाभ को केवल, अपने व अपने परिवार से आगे जाने ही नहीं दिया। जिस समाज ने लम्बे समय तक शोषण झेला है उस समाज को आरक्षण मिलना चाहिए व जरूरतमंद को सुविधा मिलनी चाहिए. इस बात का विरोध करना गलत होगा पर कुछ लो...

सनातन हिन्दू युवा वाहिनी ने किया कपिल मिश्रा की मुहिम का समर्थन.

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मंदिर स्वच्छता अभियान से जुड़े कई समाजिक व धार्मिक संगठन कपिल मिश्रा द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का सनातन हिन्दू युवा वाहिनी ने भी किया समर्थन.  दिल्ली की लगभग सभी विधानसभाओं मे संगठन के कार्यकर्ता व पदाधिकारियों मे अपने निकटतम मंदिरों की सफाई की जिसमें प्रदेश के अध्यक्ष विक्रम गोस्वामी भी शमिल थे गोस्वामी ने सनातन धर्म मे आस्था व विश्वास रखने वाले सभी लोगो से अपील की मंदिर स्वच्छता अभियान से जुड़े व इस सेवा कार्य को निरंतर करना होगा विशेष तौर पर युवा वर्ग को आगे आना होगा जिससे युवाओं मे धर्म के प्रति जागरूकता आए. इस सेवा कार्य मे श्री सीता राम राठौर , श्री अरुण शर्मा , डा. पेह्लद , श्री  संजय तरफदार, श्री आनंद शर्मा , श्री बलराम झा , श्री अनिल गुप्ता , श्री विक्की चौधरी , श्री योगेश कश्यप, श्री प्रमोद चौरसिया, श्री कमल चौहान , श्री राज सिद्धार्थन मौर्या, श्री महेश कश्यप, श्री पवन शर्मा, श्री नंदकिशोर बैरवा, श्री दीपक टांक, श्री पुलकित श्री विकास सिंह, गौरव सिह, मनीष गिरी,श्री संदीप शास्त्री,आदि सभी टीम के साथ कार्य कर रहे थे सनातन हिन्दू युवा वाहिनी एक ...

मिल कर लड़नी होगी महापुरुषों के सम्मान की लड़ाई: विक्रम गोस्वामी

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मिल कर लड़नी होगी महापुरुषों के सम्मान की लड़ाई: विक्रम गोस्वामी भारत की मिट्टी अनेको बार खून से लाल हुई है रक्त-रंजित दीवारों को रंग रोगन जरूर कर दिया गया है पर आज भी ये इमारतें किले उस मंजर को बया करते है जो उस दौर मे हुआ था जबरन धर्म परिवर्तन करना, महिलाओ का  शोषण, लूटपाट, घोर अत्याचार, परन्तु हमारे सामने चाटूकार इतिहासविदों ने इन भक्षकों को रक्षक  प्रस्तुत किया है, उनका ही महिमा मंडन किया है जिन्होंने हम पर अत्याचार किये। मुस्लिम शासकों ने जिस प्रकार की क्रूरता यहां पर दिखाई थी उसको बहुत ही छोटा करके दर्शाया गया है और हिंदुओं के ऊपर जो अत्याचार हुए थे उसको छिपाने का प्रयास किया गया है। दिल्ली सल्तनत मुगल वंश इन्होंने जिस प्रकार से क्रूरता से हिंदुओं का नरसंहार किया शायद ही ऐसा पूरी दुनिया में कहीं भी नहीं हुआ था। किंतु इतिहास में इसका वर्णन करने की बजाय इतिहासकारों ने चटुकारिता के चलते ज्यादा ध्यान दिया की अकबर कितना महान था; अलाउद्दीन खिलजी कितना दिलदार था और औरंगजेब कितना बढ़िया शासक था। उस समय के महान हिन्दू राजाओ की कृति को छुपा कर रखा गया और उन सभी लोगों की ...

सनातन हिन्दु युवा वाहिनी करा रहें हैं हनुमान चालीसा प्रतियोगिता: विक्रम गोस्वामी

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श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि। अर्थ-  श्री  गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है।

सनातन हिन्दू युवा वाहिनी संगठन ने छेड़ी मुहीम, विदेशी आक्रांताओं के नाम पर बने सड़के, किले, मार्ग और जगहों के नाम बदलवाने की मांग रखी

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सनातन हिन्दू युवा वाहिनी संगठन ने छेड़ी मुहीम, विदेशी आक्रांताओं के नाम पर बने सड़के, किले, मार्ग और जगहों के नाम बदलवाने की मांग रखी  सनातन हिन्दू युवा वाहिनी इकाई द्वारा कार्यकर्ता सम्मेलन हुआ  जिसकी अध्यक्षता मुख्य संरक्षक श्री कालिका पीठाधीश्वर महंत सुरेन्द्र नाथ अवधूत जी श्री अवधूत जी ने कहा युवाओं को धर्मिक कार्य मे बढ़ चढ़ कर भाग लेना चाहिए, जिससे भारत की अखंडता और एकता बनी रहे. कार्यक्रम मे हरियाणा के प्रसिद्ध गायक एम डी और कवि प्रभात परवाना जी व हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष श्री अनिल शर्मा जी  मौजूद रहे । कार्यकर्ता सम्मेलन मे विदेशी आक्रांताओं के नाम से आजादी की माँग उठी, जिन आक्रांताओं ने देश को लूटा, जबरन धर्म परिवर्तन कराया भारत की सभ्यता को नष्ट करने का कार्य किया, बलात्कार किए बर्बरता से सनातन धर्म पर प्रहर किया आखिर कब तक इन आक्रांताओं के नाम को सम्मान मिलेगा । ये नाम आजाद हिंदुस्तान मे गुलामी के प्रतीक है  दिल्ली के सड़को पर बाबर, तुग़लक़,अकबर, खिलजी, गाजी जैसे नाम रोड सड़क व इमारतों और रखी जगहों के नाम को बदलवाने के लिए सनातन हिन्दू युवा वाहिनी के ...