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Showing posts from April, 2021

कालकाजी मन्दिर दिल्ली

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कालकाजी मंदिर अरावली पर्वत श्रृंखला के सूर्यकूट पर्वत पर स्थित है इस मन्दिर को मनोकामना सिद्धपीठ मन्दिर भी कहा जाता है। माँ कालिका का ये मन्दिर देश के प्राचीनतम सिद्धपीठों में से एक है।  इस पीठ का अस्तित्व अनादि काल से है। मान्यता है कि इस ही स्थान पर आद्यशक्ति महाकाली के रूप में प्रकट हुई। और असुरों का संहार किया। माँ पार्वती ने कौशिकी देवी को प्रकट किया। जिन्होंने अनेक असुरों का संहार किया लेकिन रक्तबीज को नहीं मार सकीं। तब माँ पार्वती ने अपनी भृकुटी से महाकाली को प्रकट किया। जिन्होंने रक्तबीज का संहार किया। महाकाली का रूप देखकर सभी भयभीत हो गए। देवताओं ने माँ काली की स्तुति की तो माँ भगवती काली ने कहा जो भी इस स्थान पर श्रृद्धाभाव से पूजा करेगा, उसकी मनोकामना पूर्ण होगी। तब से ही यह मनोकामना सिद्धपीठ के रूप में विख्यात है।  एक कथा ये भी इस मन्दिर से जुड़ी है।  महाभारत काल में युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के साथ यहां भगवती महाकाली की अराधना की थी। मुख्य मंदिर में 12 द्वार हैं, जो 12 राशियों का संकेत देते हैं। वहीं परिक्रमा स्थल के...

"सभी समस्याओ का एक ही समाधान है श्रीमतभगवतगीता"

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जीवन मे हर व्यक्ति अपनी अपनी क्षमता अनुसार कार्य करता है और सफल होने का पूरा प्रयास करता है चंद लोग ही अपनी मंजिल पर पहुँच पाते है अधिकांश लोगो का जीवन संघर्षमय होता है।  हर कदम पर समस्या, हर कार्य मे कठनाई, लक्ष्य की प्राप्ति से पूर्व ही हार मान लेना ये सब के जीवन का हिस्सा बन गया है। जो समस्या आप के जीवन मे आज है उसका समाधान भगवान श्री कृष्ण ने करीब 5159 साल पहले कुरुक्षेत्र मे गीता के रूप मे दिया था जिसके कुल 18 अध्याय है।  उन सभी 18 अध्याय को वर्तमान की समस्याओं के समाधान के रूप मे समझते है। प्रथम अध्याय- *अर्जुनविषादयोग* (सेना का निरीक्षण) दुर्योधन ने अपने गुरु के पास जा कर कहा... हे आचार्य आपके बुद्धिमान शिष्य ध्रुपद पुत्र धृष्टद्युम्न के द्वारा व्यू  रचना से खड़ी हुई पांडवों की इस भारी भरकम सेना को देखिए। और सभी महारथियों का वर्णन किया। और उनकी तुलना मे अपने महापराक्रमी महारथियों के विषय मे बताया।  तत्पश्चात पितामाह भीष्म ने अपना गंगनाभ: शंख बजाया।  दूसरी और से श्रीकृष्ण ने अपना पाञ्चजन्य शंख बजाया। भगवान कृष्ण के शंखनाद के बाद सभी ने अपने अपन...

पाण्डवों की राजधानी इस आधुनिक युग मे दिल्ली के नाम से जानी जाती है

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इन्द्रप्रस्थ से ढिल्लिकापुरी और वर्तमान मे दिल्ली. अनेकों बार दिल्ली मे बहने वाली जमना खून से लाल हुई है इस दिल्ली ने कई युद्ध देखे है कई बार लूटी फिर बसी ये दिल्ली हर विदेशी आक्रांताओं के निशाने पर रही है दिल्ली जब हम दिल्ली के इतिहास को खंगालते है तो पता चलता है। जो हमें पढ़ाया जा रहा है उसमे केवल विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन किया जा रहा है। उनकी लूट को भारत पर महानता के नाम पर थोपा जा रहा है। दिल्ली के वास्तविक संस्थापक राजा अनंगपाल तोमर प्राथम थे (736-754 ई.) उनके योगदान व उनके चरित्र को छिपाया गया। अनंगपाल तोमर द्वितीय ने महरौली के विष्णु स्तंभ की स्थापना कराई। और कई मंदिरों का निर्माण कराया. जिनमें जैन मन्दिर भी शमिल थे। उनके द्वारा बनाए गए मंदिरों व महल का वर्णन आमिर खुसरो मे भी उल्लेख है। सभी मंदिरों को ध्वंस कर  कूतूबदीन ऐबक ने कुब्ब्तुल मस्जिद बनवाई थी। जिसे आज  कुतुब मीनार कहा जाता है वो भी एक मन्दिर ही था। अनंगपाल तोमर जी का इतिहास बड़ा शौर्यवान था। उनके द्वारा एक छोटी सी सुन्दर झील अनंगताल का निर्माण कराया। जो की फरीदाबाद के अनंगपुर गावं के पास स्थित ह...

"दोष चौपाई मे नही तुम्हरी सोच मे है"

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प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं।  मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥ ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥ रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड से ली गई ये चौपाई आप ने कई बार सुनी होगी। कुछ लोग सनातन धर्म के विभाजन की मनसा से अधूरे ज्ञान को ऐसे प्रस्तुत कर रहे है जैसे उनसे बड़ा ज्ञानी कोई इस धरा पर नही है।  ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥ इस अधूरी चौपाई को बड़े बड़े मंचों से उच्चारित किया जाता है। ऐसा भी  नही है की वे लोग इस का सही अर्थ नही जानते है। या फिर उनको पता नही है। परन्तु वे इसको अधूरा प्रस्तुत कर लोगो मे भेद(फूट) डालना चाहते है। कुछ लोग ताड़ना के स्थान पर प्रताड़ना बोलते है जो की पूरी तरहा से गलत है । ताड़ना व प्रताड़ना दोनो शब्दों के अर्थ अगल-अलग है! अगर हम इस चौपाई की बात करें तो  ऊपर की पंक्ति,  प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं।  मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥ इससे ये साफ स्पष्ट हो जाता है की अगली पंक्ति मे ताड़ना शब्द का अर्थ सीख देना है। आमतौर पर लोग चालाकी के लिए भी इस शब्द का इस्तमाल करते है। वह काम को जल्दी ताड़ लेता है। अर्था...

"आप की समस्या इस लिए बड़ी है क्योंकि आपने गीता नही पढ़ी है"

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हर एक व्यक्ति को लगता है ईश्वर ने दुनिया के सभी दुख उसके खाते मे लिख दिए है सभी को लगता है की उसकी समस्या दूसरों से काफी बड़ी है कभी कभी तो ईश्वर भी इनके द्वारा कोशा जाता है. सुख के अनुपात मे दुःख अधिक आता है. बहुत कुछ पा कर भी व्यक्ति निराश ही कालचक्र पूरा करके  चला जाता है. आमतौर पर आप और हम सुनते है। एक दूसरे को  संबोधित करते हुए. बस चल रहा है, समय काट रहे है, समस्या तो समस्या ही होती है पर उसके रूप अलग अलग है  कोई तन से, कोई मन से, कोई धन से दुःखी होता है किसी को पद प्रतिष्ठा चाहिए, किसी को मान सम्मान चाहिए, सभी के जीवन मे कुछ ना कुछ गठित हो रहा है जो उसको चिन्तित करता है चिंता का समय से निदान नही किया जाए तो वह बहुत विराट रूप ले लेती है  ऐसा ही परिस्थिति कुरुक्षेत्र मे महान धनुर्धर अर्जुन के सामने भी आई थी जब रणभूमि सज चुकी थी और अर्जुन सही निर्णय नही ले पा रहे थे और वो युद्ध के प्रारम्भ से पहले ही हार मान चुके थे. अर्जुन को हताश और निराश देख भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। ये वो समय था जब अर्जुन अपना आत्मविश्वास खो रहा था. परिवार के...

दलितों का शोषण दलित ही कर रहें है. विक्रम गोस्वामी

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कभी शूद्र क़हलाने वाले हमारे भाइयों को महात्मा गांधी जी ने  "हरिजन" का सम्बोधन दिया यानी हरि के जन , भगवान हरि के पुत्र, उनके उत्थान की बात करने वाले कुछ हरिजन नेताओ ने ही हरिजन शब्द को कही छुपा दिया और एक नया शब्द दिया "दलित" अथार्थ जो दला गया हो या शोषित हुआ हो, अब "दलित" शब्द से संबोधन किया जाता है उन मेहनतकश लोगों को जो केवल सेवा को अपना धर्म मानते रहें है उनको अलग अलग नाम से संबोधित किया जाता रहा है कुछ शब्द ऐसे भी है जो किसी गाली से कम नहीं है. पर इस सब के पीछे आखिर कौन है  जिसके कारण ये समाज पिछड़ता गया और आज भी विशेषआ अधिक (आरक्षण) होने के बावजूद पिछड़ता ही जा रहा है. कहीं ऐसा तो नहीं आरक्षण चंद लोगों की बपौती बन कर रह गया हो. उन लोगों तक ये विशेष अधिकार पहुंचा ही नहीं जिनको इस की वास्तविकता में  आवश्यकता थी ऐसा लगता है  कुछ लोगों ने आरक्षण के लाभ को केवल, अपने व अपने परिवार से आगे जाने ही नहीं दिया। जिस समाज ने लम्बे समय तक शोषण झेला है उस समाज को आरक्षण मिलना चाहिए व जरूरतमंद को सुविधा मिलनी चाहिए. इस बात का विरोध करना गलत होगा पर कुछ लो...

सनातन हिन्दू युवा वाहिनी ने किया कपिल मिश्रा की मुहिम का समर्थन.

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मंदिर स्वच्छता अभियान से जुड़े कई समाजिक व धार्मिक संगठन कपिल मिश्रा द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का सनातन हिन्दू युवा वाहिनी ने भी किया समर्थन.  दिल्ली की लगभग सभी विधानसभाओं मे संगठन के कार्यकर्ता व पदाधिकारियों मे अपने निकटतम मंदिरों की सफाई की जिसमें प्रदेश के अध्यक्ष विक्रम गोस्वामी भी शमिल थे गोस्वामी ने सनातन धर्म मे आस्था व विश्वास रखने वाले सभी लोगो से अपील की मंदिर स्वच्छता अभियान से जुड़े व इस सेवा कार्य को निरंतर करना होगा विशेष तौर पर युवा वर्ग को आगे आना होगा जिससे युवाओं मे धर्म के प्रति जागरूकता आए. इस सेवा कार्य मे श्री सीता राम राठौर , श्री अरुण शर्मा , डा. पेह्लद , श्री  संजय तरफदार, श्री आनंद शर्मा , श्री बलराम झा , श्री अनिल गुप्ता , श्री विक्की चौधरी , श्री योगेश कश्यप, श्री प्रमोद चौरसिया, श्री कमल चौहान , श्री राज सिद्धार्थन मौर्या, श्री महेश कश्यप, श्री पवन शर्मा, श्री नंदकिशोर बैरवा, श्री दीपक टांक, श्री पुलकित श्री विकास सिंह, गौरव सिह, मनीष गिरी,श्री संदीप शास्त्री,आदि सभी टीम के साथ कार्य कर रहे थे सनातन हिन्दू युवा वाहिनी एक ...

मिल कर लड़नी होगी महापुरुषों के सम्मान की लड़ाई: विक्रम गोस्वामी

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मिल कर लड़नी होगी महापुरुषों के सम्मान की लड़ाई: विक्रम गोस्वामी भारत की मिट्टी अनेको बार खून से लाल हुई है रक्त-रंजित दीवारों को रंग रोगन जरूर कर दिया गया है पर आज भी ये इमारतें किले उस मंजर को बया करते है जो उस दौर मे हुआ था जबरन धर्म परिवर्तन करना, महिलाओ का  शोषण, लूटपाट, घोर अत्याचार, परन्तु हमारे सामने चाटूकार इतिहासविदों ने इन भक्षकों को रक्षक  प्रस्तुत किया है, उनका ही महिमा मंडन किया है जिन्होंने हम पर अत्याचार किये। मुस्लिम शासकों ने जिस प्रकार की क्रूरता यहां पर दिखाई थी उसको बहुत ही छोटा करके दर्शाया गया है और हिंदुओं के ऊपर जो अत्याचार हुए थे उसको छिपाने का प्रयास किया गया है। दिल्ली सल्तनत मुगल वंश इन्होंने जिस प्रकार से क्रूरता से हिंदुओं का नरसंहार किया शायद ही ऐसा पूरी दुनिया में कहीं भी नहीं हुआ था। किंतु इतिहास में इसका वर्णन करने की बजाय इतिहासकारों ने चटुकारिता के चलते ज्यादा ध्यान दिया की अकबर कितना महान था; अलाउद्दीन खिलजी कितना दिलदार था और औरंगजेब कितना बढ़िया शासक था। उस समय के महान हिन्दू राजाओ की कृति को छुपा कर रखा गया और उन सभी लोगों की ...