परिचय

मैं विक्रम गोस्वामी दिल्ली में रहता हूँ! दिल्ली मतलब भारत का दिल,  दिल में जगह मिल जाए इस से बड़ी बात क्या होगी! पर बात तो तब बनेगी जब लोगो के दिलो में जगह मिले, 
हर व्यक्ति चाहता तो यही है पर जो प्रयास करता है बही दिलो में जगह बना पाता है  आज अधिकांश लोग बिना चले पहुँचना और बिना करें पाना चाहते है जो की संभव नहीं है!
खुलीं आँखो से सपने देखना बहूत आसान है पर उनको पूरा करने के लिए स्वंय को तपाना पड़ता है ये बात कोई नई नहीं है ऐसा भी नहीं की आप और मैं इस बात को जानते नहीं पर संघर्ष की कसौटी पर स्वयं कसना कौन चाहता है. 

मैंने हर बार चलना प्रारम्भ किया पर कुछ समय बाद अपने आप को वही पाया जहा से चलना शुरू किया था।
अब चलते हुए समय अधिक हो गया है पर मैं वही का वही हूँ. पैर उठा कर नीचे रखने को चलना नहीं बल्कि पैर आगे रखने को चलना कहते है. इतनी सी बात समझने मे बहूत समय लग गया. 

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