समय है समझ जाओ दोस्त

अक्सर समझ और समय दोनों एक साथ 
नहीं आते है 
जब समय होता है तो समझ नहीं आता है 
जब समझ आता है तो समय निकल जाता है.



इधर जाऊ या उधार जाऊ 
है कशमकश किधर जाऊ 
गर भर गया हो मन तेरी मुझे से 
दें इजाज़त मूझे की अब मैं मर जाऊ. 

मैंने देखें है सुलगते अंगारे कई 
पर तेज हवओ ने उनको टिकने ना दिया 
लगे रही थी बोली मेरी भी जज्बातों की मंडी मे 
पर मेरे हालातों ने मूझे बिकने ना दिया.




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