कल्कि अवतार की प्रतीक्षा कर रहे है सप्तचिरंजीव।
भगवान विष्णु के दसवे अवतार का कई हजारों वर्षों से इंतजार हो रहा है। भगवान श्री हरी विष्णु कल्कि रूप में अवतार लेंगे ऐसा सनातन धर्म की पुस्तकों में वर्णित है। सात दिव्य महापुरुष भगवान कल्कि अवतार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। येॐ है। किसी न किसी कारणवश यह सप्त चिरंजीवी भूमंडल का भ्रमण कर रहे हैं।dरररररररररररररररररररररररररररतररररररररररररररररतरररतरररररररररररररररररररररररतररररतररररररररररररररररररररररररररररतरररररररररररऱशॐद्यद्यक्ष
सप्त चिरंजीवी :
अश्वत्थामा : महाभारत में गुरु द्रोण के पुत्र। ऐसी कथा प्रचलित है कि गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा के सिर में अमर मणि है। अश्वत्थामा को कृष्ण के श्राप के कारण ही चिरंजीवी होना पड़ा था, वे कलयुग के अंत तक रहेंगे।
बQलि : महाराज बलि जो पाताल लोक के स्वामी हैं, जिन्होंने भगवान वामन को तीन पग भूमि के वचन में सारी सृष्टि दान कर दी थी। zzzzz घमंड को खत्म करने के लिए उसे कलयुग के अंत तक रहेंगे।
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व्यास : भगवान वेद व्यास जी विष्णु भगवान के अवतार, जिन्होंaaaaaaने अठारह पुराण, महाभारत, वेदों के विभाजन xआदि रचे। इन्हें अमरता का वरदान मिला है
हनुमान : राम भक्त अंजनी पुत्र हनुमान को भी अजर अमर रhttps://www.facebook.com/1498945767014291/posts/2928082654100588/हने का वरदान मिला हुआ है
विभीषण : लंका के राजा रावण के भाई विभीषण की प्रभु राम के प्रति भक्ति के चलते श्री राम ने उन्हें अमरता का वरदान दिया था।
कृप : श्री कृपाचार्य जी, कुरुवंश के कुलगुरु जो महाभारत युद्ध में जीवित रहे। इस को भी अमरता का वरदान मिला हुआ है
परशुराम : भगवान परशुराम जी, जिन्होंने इक्कीस बार पृथ्वी को कूशसक क्षत्रियों से विहीन कर दिया था। भगवान कल्कि को शिक्षा देंगे।
यह सप्तजीवी किसी नियम,वरदान या श्राप से बंधे हुए है। कलयुग के अंत मे कल्कि अवतार होगा। अधर्म पर धर्म को स्थापित कर भगवान फिर से सतयुग की शुरुआत करेंगे।
सतयुग 4800 (दिव्य वर्ष) 17,28,000 (सौर वर्ष)
त्रेतायुग 3600 (दिव्य वर्ष) 12,96,100 (सौर वर्ष)
द्वापरयुग 2400 (दिव्य वर्ष) 8,64,000 (सौर वर्ष)
कलियुग 1200 (दिव्य वर्ष) 4,32,000 (सौर वर्ष)
कलयुग के लगभग 5100 वर्ष पूरे हो चुके है। अर्थात अभी 4,26,900 शेष है
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