धर्म
समय के साथ-साथ जब लोग बदलने लगे तो समझ लो आप का समय भी बदल रहा है और बदलाव ही प्रकृति का नियम भी है। प्रकृति से सीखना चाहियें। वसंत ऋतु मे पेड़ पौधे, बाग बगीचे, खेत खलियान हरे भरे होते है वहीं शरद ऋतु मे हरे भरे पेड़ भी अपने पत्तों को स्वयं ही अपने से दूर कर देते है। क्योंकि नया तब तक संभव नहीं है जब तक पुराने से मोह भंग ना हो।
इसमे मैं किसी को छोड़ने के विषय मे बात नहीं कर रहा हूँ क्योंकि जिसे आपने सही से पकड़ा ही नहीं है उसे छोड़ा कैसे जा सकता हैं। कहीं ऐसा तो नहीं की आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी को अपना बनाते हो और छोड़ते हो। ये कथन किसी एक व्यक्ति या समूह के लिए नहीं अपितु समस्त सांसारिक प्राणियों के लिए है। धर्म, समाज, रिश्ते, सभी हमारी सुविधा के अनुसार ही होते है। क्या हम पूर्णरूप से धर्म के नियमों के अनुसार चलते हैं, क्या हम सही से अपने सामाजिक कार्य कर पा रहे हैं? क्या हम अपने रिश्तों के साथ पूरी तरहा न्याय कर पा रहे हैं? अगर नहीं तो जान लो धर्म समाज और रिश्ते के संचालक आप हो।
आप धर्म और समाज के अनुसार नहीं बल्कि आप अपने अनुसार सभी को चलाते हो वो भी अपनी सुविधा देखते हुए। अभी केवल धर्म की बात करें तो धर्म एक ऐसा दर्पण है जिसमें स्वयं का प्रतिबिम देखा जा सकता है। जिसको अनेकों लोगो ने अपने अपने अनुसार परिभाषित किया है एक से बढ़कर एक उदहारण समाज के सामने प्रस्तुत किए गए है जिससें धर्म को समझा जा सके।
धार्यते इति धर्म:" अर्थात जो धारण किया जाये वह ही धर्म है। जीवन को सुचारू रूप से जीने के लिए बनाएं गए नियम ही धर्म हैं इन नियमों की संखला बड़ी या छोटी हो सकती हैं कमोवेश चार धर्मों की बात होती हैं परंतु दुनियाभर मे लगभग 300 धर्म के मानने वाले लोग रखते हैं।
अगर कुछ प्रमुख धर्मों पर बात करें, तो शुरुआत मे हमें सनातन धर्म के विषय मे जरूर जानना चाहियें। चूंकि सनातन धर्म आदि अनादि काल से चला आ रहा है। कुछ जानकारों के अनुसार सनातन धर्म सभी धर्मों का आधार व जन्मदाता है। सनातन ही शाश्वत है जिसे किसी जाति, पंथ, संप्रदाय मे बांधा ना जा सके। वेद, पुराण, उपनिषद ,काव्यों, महाकाव्यों आदि से संस्कारित सनातन धर्म के मानने वाले सूरज, चंदा, तारे, नदी, पर्वत, पेड़-पौधें, पशु, पक्षी, आदि सभी को पूजते है अर्थात प्रकृति का संतुलन बनाएं रखने के लिए सभी का सम्मान करते है। प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से देखें तो अन्य धर्मों के लोग कर वहीं रहे है जो सनातन परंपरा मे बताया गया है परंतु स्वयं को अलग प्रस्तुत करने की प्रतिस्पर्घा चल रही है। इसमें लोग खुद को दूसरों से अलग ही नहीं बल्कि महान व पुरातन बताने मे लगे है।
अगले अध्याय मे हम हिन्दू, इस्लाम, जैन, बौद्ध, सिख, यहूदी, पारसी, ईसाई, यजीदी, बहाई आदि धर्मों पर क्रमशः चर्चा करेंगे।
Jay Shree Ram
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