सरकार पुजारियो ओर मोलवियों में फर्क कर रही है:विक्रम गोस्वामी
दुनिया इस वक्त कोरोना के कहर से जूझ रही है ओर यह महामारी वैश्विक तोर पर फैल रही है ऐसे में लोगो में डर का माहौल है वही एक ओर देश मेंं जहाँ एक तरफ कोविड़ 19 ने जिस कदर कहर ढाया है उसका मुख्य कारण मरकज से निकले हज़ारो जमातियों का कोरोना को देेेश भर में लाने फैलाने के प्रकरण से देश मे अलग माहौल बना हुआ है वही मन्दिरो से हाल ही में सोना लेने की बात को लेकर हिन्दुओ के धर्मगुरु ओर हिन्दुओ के संगठन नाराज है इसी बात को लेकर सनातन हिन्दू युवा वाहिनी दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष विक्रम गोस्वामी ने कहा कि हिन्दुओ को ही हमेशा ही टारगेट किया जाता रहा मंदिरो से सोना मांगने की बात हो या कुछ और मुद्दा यह हमेशा चलता रहा है पर पुजारियों और मौलवियों मे सरकार फर्क डाल रही है वह सरासर गलत है जब मौलवियों को तनख्वाह दी जा सकती है तो पुजारियों को क्यू नही उनके साथ सौतेला रवैया किस लिए....सरकार दोनों को दो अलग अलग चश्में से देखती है इन दिनो सभी मंदिर बंद थे दिल्ली मे हर कॉलोनी मे दो या चार मंदिर है उनमें पूजा करने वाले पुजारी और उनके परिवार पर सुध लेने वाला कोई नही है लाकडाउन के समय भी सरकार उनके लिये कुछ नही किया हालाँकि देश के कई मन्दिरो ने कोरोना काल मे अपना फर्ज निभाया ओर करोड़ो रूपये देकर अपना योगदान दिया है और हर रोज़ बगैर किसी भेद भाव के लाखों लोगों को रोज़ खाना भी मुहैया करवा रहे है लेकिन वही देश मे कई लाख मन्दिर ओर स्टेटस में हज़ारो मन्दिरो के पुजारी इस वक्त परेशान है जहाँ कोरोना से लाकडाउन में मन्दिर बन्द है तो उससे जुड़े ऐसे ही पुजारी ओर उनके परिवार खाने को मोहताज़ है क्योंकि यह पुजारी केवल मंदिर में आने वाले लोगो के अनुदान ओर दान से ही अपने परिवार का पेट पालन कर रहे थे अब इस वक्त उनके पास कोई दूसरा विकल्प नही है न ही पूजा पाठ कही हो है और नही यज्ञ अनुष्ठान,शादी समारोह इत्यादि ऐसे में सरकार का इनके लिए कोई फर्ज नही बनता की इनकी कोई व्यवस्था की जाय क्योंकि यही वह लोग है जो भारत की पूजा पद्धत्ति ओर मान्यताओ को संजोय हुये है ओर वैसे भी भारत का इतिहास रहा है कि ब्राह्मण भूखा नही रक्खा जाता बड़े बड़े राजाओ महा राजाओ ने भी मंदिर के पुजारियो ओर ब्राह्मणों को सदैव आदर सत्कार किया है उसी तरह देश की परंपरा को आगे बढ़ाते हुये इनको भी जिस तरह से मदरसों में मौलवियों, चर्च में पादरियों को जो सहूलियत दी जाती है वो सुविधाये ओर अनुदान मंदिर के हज़ारो पुजारियो को भी मिलनी चाहिये ताकी भारतवर्ष की परंपरा और सनातन धर्म सजोये यह पुजारी,ब्राह्मण भूखे न रहे अन्यथा इतिहास गवाह है की चाणक्य जैसे ब्राह्मणों का जिन्होंने वक्त ओर सत्ता दोनो को परिवर्तित कर दिया था।
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