"क्रोध और विरोध जरूरी है"

"क्रोध और विरोध जरूरी है"
पितामह भीष्म जब भूलोक का कालचक्र पूरा कर स्वर्ग पहुँचे, अपना स्थान जटायु से नीचे देख अपने स्वभाव के अनुरूप पितामह क्रोधित हो गए और चित्रगुप्त जी से बोले मैं गंगापुत्र भीष्म, भगवान परशुराम का शिष्य, अटल प्रतिज्ञा का उद्घोषक,
महारथियों का पितामह आपने मेरा स्थान एक मांस भक्षी पक्षी के नीचे रखा है। चित्रगुप्त जी मुस्कुराते हुए बोले, पितामह  जानता हूँ कि आप पराक्रमी, बुद्धिमान, व प्रतिज्ञा का पालन करने वाले हो। परंतु आप उस समय मौन व तटस्थ रहे जब आप को  विरोध करना चाहिये था।
पांचाली का चीर हरण हो रहा था तब आपको क्रोध नहीं आया आप जैसा महापराक्रमी, ज्ञानी एक नारी के चीरहरण पर मौन रहा। 
लेकिन जब माता सीता का हरण कर रावण ले जा रहा था, तो ये कमजोर पक्षी एक नारी के सम्मान के लिए शक्तिशाली, मायावी रावण से भीड़ गया और लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ। जटायु ने समय पर क्रोध किया और गंगापुत्र आप समय पर विरोध भी न कर सके। इसलिए जटायु का स्थान आपके स्थान से ऊँचा हो गया।
शिक्षा: देश,धर्म, व समाज और स्वाभिमान का जब कोई चीर हरण की कोशिश करें तो क्रोध स्वाभाविक आना चाहिए। समय पर क्रोध व विरोध बड़ी हानि से बचा सकता है। 
"सत्य बोलना मेरा स्वभाव है"
 *"विक्रम गोस्वामी"* 
 *www.vikramgoswami.in*

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

सादगी से मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा महोत्सव

कांवड़ यात्रा में हिंदू नाम से दुकानें खोलना धोखा है, अपनी असली पहचान बताएं – महंत सुरेन्द्र नाथ अवधूत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत को बनाया विश्व हिन्दु महासंघ का भारत का अं​तरिम अध्यक्ष