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अनुभव अच्छा और बुरा

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हर समस्या पिछली समस्या से बड़ी क्यों लगती है|  केवल इस लिए चूंकि हम हर बुरे वक़्त और बुरी बात को बहूत जल्द भूल जाना चाहते है. हमें लगता है इस समस्या से पार पाने के बाद हमारे जीवन मे कोई और समस्या नहीं आएगी केवल इस पर विजय पानी है   जब हम समस्या को परास्त कर देतें है तब हम स्वंय की पीठ थपथपाते है और स्वंय को अधिक श्रेय देतें है और यदि विफल हो जाते है तो दूसरों पे फैल होने का ठीकरा फोड़ा जाता है खैर विषय समस्या का सरूप है तो उस ही पर लौटे चलते है जैसे जीवन की हर बड़ी से बड़ी उपलब्धि का उल्हास भी कुछ समय के बाद कम हो जाता है और थोड़ा अधिक समय हो जाने के बाद समाप्त हो जाता है. उस ही प्रकार समस्या भी एक समय के बाद छोटी लगने लगती है जैसे जब हम कक्षा 7 की परीक्षा देने की तयारी करते है तब बहूत मुश्किल होती है और सही से पढ़ने के बाद जब हम उतीर्ण होते है सफलता का सुखद अनुभव करते है फिर कक्षा 8 ,9,10,11के बाद कक्षा 7 के सभी प्रश्न बहूत सरल लगते है जो किसी समय बहूत कठिन थी. तब हम उस योग्य बन जाते है की कक्षा 7 के विद्यार्थी को पढ़ व समझा सके. ये पुराना दस्तूर रहा है ...

परिचय

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मैं विक्रम गोस्वामी दिल्ली में रहता हूँ! दिल्ली मतलब भारत का दिल,  दिल में जगह मिल जाए इस से बड़ी बात क्या होगी! पर बात तो तब बनेगी जब लोगो के दिलो में जगह मिले,  हर व्यक्ति चाहता तो यही है पर जो प्रयास करता है बही दिलो में जगह बना पाता है  आज अधिकांश लोग बिना चले पहुँचना और बिना करें पाना चाहते है जो की संभव नहीं है! खुलीं आँखो से सपने देखना बहूत आसान है पर उनको पूरा करने के लिए स्वंय को तपाना पड़ता है ये बात कोई नई नहीं है ऐसा भी नहीं की आप और मैं इस बात को जानते नहीं पर संघर्ष की कसौटी पर स्वयं कसना कौन चाहता है.  मैंने हर बार चलना प्रारम्भ किया पर कुछ समय बाद अपने आप को वही पाया जहा से चलना शुरू किया था। अब चलते हुए समय अधिक हो गया है पर मैं वही का वही हूँ. पैर उठा कर नीचे रखने को चलना नहीं बल्कि पैर आगे रखने को चलना कहते है. इतनी सी बात समझने मे बहूत समय लग गया.