"मनोज तिवारी जी के संघर्ष व उनके संघर्ष के साथियों को प्रणाम "
किसी ने बहूत खूब कहा है की संघर्ष इतनी खामोशी से हो की सफलता खुद बा खुद शोर मचा दें.
आज हम एक एसे ही व्यक्तिव पर चर्चा करने जा रहे है जिसने बल्ला उठाया तो बनारस विश्व विद्यालय क्रिकेट टीम के कप्तान बने, गायकी ने मृदुल नाम का सम्मान दिया, जिनके अभिनय नें बॉलीवुड के बड़े-बड़े कलाकारों को भोजपुरी के ओर मोड़ दिया, जो आज युवाओं के राजनेतिक रोल मॉडल है वर्तमान के सांसद व पूर्व भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी.
मनोज तिवारी जी का जन्म 1 फरवरी 1971 बिहार जिला तेमूर गावं अतरबलिया मे हुआ. पिता श्री चन्द्रदेव तिवारी साधारण किसान थे उनकी रुचि शास्त्रीय संगीत मे थी गाते भी बहुत मधुर थे समाजिक बुराइयों को अपने गायन से समाज के सामने प्रस्तुत करते थे. माँ ललिता देवी गृहिणी हैं मनोज को मिला कर पांच भाई बहन सभी नें उच्च शिक्षा प्राप्त की हैं.
मनोज जी और संघर्ष का मानो चोली-दामन का साथ रहा हो, गांव में पढ़ाई की सुविधाएं न होने के कारण इंटर तक की पढ़ाई के लिए गावं से लगभग चार किलो मीटर दूर पैदल जाते थें.
पिता की प्रेरणा से ही मनोज तिवारी अपनी गायकी से समाजिक बुराईयों पर प्रहार करते थे.और हल्दीघाटी के शौर्य गीत से स्कूल मे सभी अध्यापकों के चहिते बने हुए थें. उस समय मनोज जी की उम्र महज 14 वर्ष थी जब पिता का हाथ सर से उठ गया. इस घटना से मनोज सहित पूरा परिवार टूट सा गया. समय के साथ चलना ही जीवन हैं बस इसी मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए जीवन मे आगे बढ़ने लगे, और साथ ही साथ संघर्ष की राह और भी कठिन होने लगी.
आदर्श इंटर कॉलेज के बाद इन्होंने उच्च शिक्षा की लिए बनारस विश्व विधालय की ओर रुख किया, बनारस में रह कर ही B. PHD व M.PHD की पढ़ाई की. मनोज में संस्कार और प्रतिभा की कोई कमी ना थी, पढ़ाई के साथ साथ खेल मे बहूत अच्छे थें कॉलेज क्रिकेट टीम की कप्तानी भी की और साथ ही साथ पुलिस सर्विस की तयारी भी करते थे.
एक अच्छी आवाज और विरासत में मिली गायकी कला के बावजूद 5 साल तक बड़ी मेहनत से नोएडा के स्टूडिओ के चक्कर लगाने के बाद सन 1996 मे तिवारी जी की पहली म्यूजिक एल्बम आई *बाडी शेर पर सवार* . इस के बाद लगातार समाजिक मुददों बेरोजगारी, दहेज, आतंकवाद, पर मनोज गाते गए और लोगों के दिल अपना स्थान बनाते गए. सन 2004 भोजपुरी फिल्मों में बतौर एक्टर डेब्यू किया था फ़िल्म का नाम था *ससुरा बड़ा पईसा वाला* भोजपुरी सिनेमा को फिर से उस ऊचाई पर लें गए जिसका वो हकदार था बॉलीवुड के बड़े बड़े सितारों को भोजपुरी पर्दे मे लाना भी मनोज जी की उपलब्धि हैं अब तक लगभग 3500 गानें गा चुके हैं और 90 से अधिक फिल्म कर चुके हैं
सन 2010 वो साल था इस मे मनोज जी नें केवल कष्ट को देखा ओर भोगा परीवारीक समस्याओं का रूप बड़ा हो चुका था.फिर वो समय भी आया जिसने तिवारी जी को अकेला कर दिया पर आने वाला समय उनका इंतजर कर रहा था जब उनकी मुलाकात तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से गुजरात मे बिहार शताब्दी उत्सव मे हुई.
इस के बाद सन 2012 मे अन्नान आंदोलन मे ही शामिल हुए उदेश्य साफ था केवल देश सेवा. पूर्व मे लड़े चुनाव के बाद एक वार भी राजनैतिक मंच पर तिवारी जी मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए भाजपा के उत्तरीपूर्वी दिल्ली के प्रत्याशी बने और कॉंग्रेस के जय प्रकाश अग्रवाल जी को हरा कर संसद पहुंचे.
असल सिलसिला अब शुरू हुआ. मार्च 2016 मे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का पद मिला. तिवारी जी के नेतृत्व मे 2017 के निगम मे बम्पर जीत हासिल हुई उपचुनाव मे सफलता मिली. दिल्ली विधानसभा चुनाव मे 3 सीट से 8 सीट हुई और वोट प्रतिशत मे बढ़ोतरी हुई. सन 2019 के लोकसभा चुनाव मे उस ही सीट से 3 वार दिल्ली की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित जी को हराया. ये सब सहज नहीं मिलता जीवन खपाना पड़ता हैं सफलता की राह बहुत कठिन हैं सब के बस मे नहीं हैं चलना. जो चलता हैं वहीं मंजिल पर पहुचता हैं.
"मनोज तिवारी जी के संघर्ष व उनके संघर्ष के साथियों को प्रणाम "
शानदार
ReplyDeleteBahut achha
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