"भारतीय जनता पार्टी का इतिहास"

21अक्टूबर 1951 में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना  की। 1952 में पहली बार देश मे आम चुनाव हुए। इस चुनाव में जनसंघ ने भी हिस्सा लिया और तीन सीटें जीतीं। इस जीत के बाद भारतीय जनसंघ राष्ट्रीय पार्टी के रूप में उभर कर सामने आई। 

देश के पहले लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस ने 364 सीटें जीत कर बहुमत प्राप्त कर लिया. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 सीटें जीत कर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई।

आचार्य नरेंद्र देव, जयप्रकाश नारायण और डॉ. राम मनोहर लोहिया के नेतृत्व वाली सोशलिस्ट पार्टी को 12 सीट, आचार्य जेबी कृपलानी के नेतृत्व वाली किसान मजदूर प्रजा पार्टी को 9 सीट, हिंदू महासभा को 4 सीट, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ को केवल 3 सीट से संतोष करना पड़ा। रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी को भी 3 सीट मिली। बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की शिड्यूल कास्ट फेडरेशन को 2 सीटें मिलीं.
23 जून 1953 को जम्मू के जेल मे ड्रा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की रहस्यमय ढंग से मृत्यु हो गई
1954 मे मौलि चन्द्र शर्मा को  भारतीय जनसंघ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।  सन 1957 के दूसरे लोकसभा चुनाव में जनसंघ के खाते मे 4 सीटें आई। 1957 मे ही अटल बिहारी बाजपाई पहली बार सांसद बने। बाजपाई की विस्तारवादी सोच ने ही सन 1962 के लोकसभा चुनाव मे जनसंघ को 14 सीट दिलाई। ये देश का तीसरा लोकसभा चुनाव था। चौथे लोकसभा चुनाव सन 1967 मे पार्टी को 35 सीट मिली. जनसंघ के प्रति लोगो का विश्वास बढ़ रहा था. 1968 मे पंडित दीनदयाल उपाध्याय का निधन हो गया। अध्यक्ष बनने से पूर्व पंडित दीनदयाल 15 वर्षों तक महासचिव के रूप में जनसंघ की सेवा करते रहे।
1969 मे अटल बिहारी बाजपाई जनसंघ के अध्यक्ष बने. सन 1971 के चुनाव मे जो की देश का पांचवा लोकसभा चुनाव था।  इस चुनाव मे जनसंघ के 22 प्रत्याशी जीते।

 सन 1975 में इंदिरा गांधी के द्वारा आपातकाल का फैसला लिया गया और देश मे अनिश्चित काल के लिए आपातकाल की घोषणा कर दी गई। इस आपातकाल के खिलाफ कई लोकतांत्रिक और राष्ट्रवादी राजनीतिक दल एक साथ आ गए। भारतीय जनसंघ और दूसरे कई दलों के इस महागठबंधन को जनता पार्टी का नाम दिया गया।

1977 के लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली। जनता पार्टी को बड़ी जीत मिली कुल 295 सीट के साथ देश की सत्ता पर काबिज हुए।मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। जबकि अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री बने और आडवाणी को सूचना एवं प्रसारण मंत्री की जिम्मेदारी दी गई।  आंतरिक खीचतान के चलते लगभग ढाई साल में ही जनता पार्टी का विभाजन हो गया। कई पार्टियों ने समर्थन वापस ले लिया। मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। जून, 1979 में चौधरी चरण सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। कांग्रेस ने चरण सिंह को समर्थन का वादा किया लेकिन सदन में बहुमत साबित करने से पहले ही कांग्रेस ने वादाखिलाफी कर समर्थन देने से मना कर दिया। नतीजा ये हुआ कि जनवरी  1980 में फिर से चुनाव कराए गए।

इस चुनाव मे भारतीय जनसंघ, जनता पार्टी के नाम पर ही लड़ रही थी।  जनसंघ के साथ जनता पार्टी को महज 31 सीटों पर जीत मिली। कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ 353 सीट पा कर सरकार बना ली।
सातवीं लोकसभा की हार ने ही भारतीय जनता पार्टी को जन्म दिया। 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का गठन किया गया। 1984 के अपने पहले लोकसभा चुनाव में जो की देश का आठवां लोकसभा चुनाव था बीजेपी को महज 2 सीटें मिलीं। 1989 में नौवीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा ने बहुत ही शानदार बढ़त दर्ज की जिनमें 85 सीटें जीतीं। और जनता दल को अपना समर्थन देकर वीपी सिंह की सरकार बनवाई।

सन 1990 में लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा निकाली। 1991 में मुरली मनोहर जोशी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। आडवाणी की इस राम रथयात्रा को देशभर का समर्थन मिल रहा था। इस रथयात्रा का नतीजा ये हुआ कि 1991 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 120 सीटें मिली।

सन 1996 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 161 सीटों पर जीत दर्ज की। अटल बिहारी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र में सरकार बना ली। महज 13 दिनों में ही सरकार गिर गई। 

सन 1998 में भारतीय जनता पार्टी के 181 सांसद जीत कर आए। अटल बिहारी फिर से प्रधानमंत्री बने। और इस बार सरकार 13 महीने तक चली सरकार केवल एक वोट से गिर गई। और सन 1999 में फिर से लोकसभा चुनाव हुए। अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार देश के पीएम बने। इस बार भी सरकार ने समय से पहले ही चुनाव करा दिया। और सन  2004 मे भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
सन 2009 लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को निराशा ही हाथ लगी। 2014 लोकसभा चुनाव के समय राजनाथ सिंह पार्टी के अध्यक्ष थे। भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ा। और पहली बार केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। इस सरकार मे बहुत से बड़े फैसले लिए और सन 2019 के लोकसभा चुनाव के समय पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह थे इस चुनाव को भी नरेन्द्र मोदी के नाम पर ही लड़ा गया।
सन 2014 के लोकसभा चुनाव मे भाजपा को 282 सीट मिली थी। जबकि सन  2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 303 तक पहुंच गया है।

Comments

  1. बहुत बढ़िया जय श्री राम गुरु जी।
    लोगो को हक्कीक़त का पता होना बेहद जरूरी है।
    जिनसे उनकी जानकारी मे वृद्धि हो।

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