फिलीस्तीन और इजरायल के बीच खूनी संघर्ष जारी है।

फिलीस्तीन और इजरायल के बीच खूनी संघर्ष जारी है। यह दोनों ही देश एक लंबे समय से जंग के साए में जी रहे हैं पूरी दुनिया इन दोनों देशों को टकटकी लगाए देख रही है। भीषण बमबारी के चलते आसमान हुए से पटा हुआ है। यहूदी और इस्लाम में बहुत ही समानता होने के बावजूद यह युद्ध धर्म के आधार पर लड़ा जा रहा है। इस जंग का मूल कारण 35 एकड़ का भूभाग है  जिस पर यहूदी, मुस्लिम और ईसाई अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहते हैं। यह स्थान यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम धर्म के लिए बेहद पवित्र स्थान है। यहूदियों के अनुसार ये एक पवित्र सुलैमानी मन्दिर था, जिसकी मात्र एक  दीवार बची है। यही मूसा ने यहूदियों को यहूदी धर्म की शिक्षा दे थी। ईसाई मत अनुसार यही शहर ईसा मसीह की कर्मभूमि रही है। इस्लाम के अनुसार इस ही स्थान से हजरत मुहम्मद बुर्राक़ पर सवार होकर जन्नत की सैर पर गए थे। 
इतिहास का अध्ययन करने के बाद पता चलता है।

विवाद के तार इतिहास से जुड़े हैं इस विवाद को समझने के लिए इतिहास को जानना बेहद जरूरी है अगर हम बात करते हैं यहूदी धर्म की तो यहूदी धर्म का उदय ईसा से लगभग 2000 साल पहले हुआ था। इस धर्म की शुरुआत पैगंबर अब्राहम से मानी जाती है, 
अब्राहम के पोते का नाम हजरत याकूब था। जिनका दूसरा नाम इजरायल था। इजरायल ने ही यहूदियों की 12 जातियों को एकत्रित कर एक राष्ट्र बनाया इजरायल।
हजरत अब्राहम को यहूदी, ईसाई और मुसलमान तीनों ही अपना पितामह मानते हैं। 
अबराहम के बाद यहूदी इतिहास का बड़ा नाम है 'पैगंबर मूसा' जिनको यहूदी धर्म का संस्थापक माना जाता है अब्राहम के बाद मूसा, दाऊद, व सुलेमान को यहूदी बहुत सम्मान देते है। यहूदी धर्म के उपरांत ईसाई धर्म की नीव  प्रथम सदी (पहली ईस्वी) रखी गई। यह धर्म यीशु मसीह के द्वारा दी गई शिक्षा के आधार पर चलता है। ईसा मसीह के जन्म के बाद ईसवी का प्रारम्भ हुआ।
570 ईसवी में मुहम्मद साहब का जन्म मक्का में हुआ था।  उस समय वहां पर मूर्ति पूजन को विशेष महत्त्व दिया जाता था। लगभग 613 इसवी मे  मुहम्मद साहब ने लोगों को उपदेश देना आरंभ किया था। इस समय को  इस्लाम का आरंभ कहा जाता है।
यदि इतिहास को क्रम अनुसार समझा जाए तो यह ज्ञात होता है यहूदियों का यरूशलम पर दावा गलत नहीं है न हीं इस्लाम और ईसाइ मत को गलत  ठहराया जा सकता है।
 तीनों ही धर्म अलग-अलग समय पर अस्तित्व में आए। परंतु वर्तमान की परिस्थितियां बेहद गंभीर हैं इन परिस्थितियों के चलते केवल ये दोनो देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को भीषण परिणाम भुगतना पड़ सकता है।

(अगले भाग मे चर्चा करेंगे यहूदी और यदुवंशी पर 
व कृष्ण और मूसा के बीच समानताओं पर )

Comments

  1. ये समस्या बहुत ही गंभीर और आश्चर्यजनक परिणाम देने बाली है। यदि फिलिस्पीन और इजराइल् के बीच चल रहे विवाद का परिणाम युद्ध हुआ तो इसका खामियाजा इन दोनो देशो को ही नही बल्कि पूरे विश्व मे इसका गहरा असर पड़ेगा।
    और जरूरत इस विवाद को सकारात्मक तरीके से लोगो तक पहुचाया जाय।

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    1. बहुत गहन दे अध्ययन किया है आपने।

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