विदेशी घुसपैठियों पर सरकार का रवैया सुस्त क्यों?
विदेशी घुसपैठियों पर सरकार का रवैया सुस्त क्यों?
वो लोग जो इजरायल और फिलिस्तीन पर ज्ञान दे रहे है। वो सभी लोग रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों पर मौन क्यों हो जाते है क्या उनको दिखना बन्द हो गया है। हमारे संसाधनों पर उनका कब्जा हो रहा है। देश के संसाधनों पर भारत के लोगो का अधिकार है। देश की स्थिति व परिस्थिति किसी से छिपी नहीं है भारत की आबादी के अनुसार भारत में सीमित संसाधन है। पर जो भी संसाधन भारत जुटा पाया है उन सभी पर भारत के नागरिकों का पहला अधिकार होना चाहिए परंतु देखा जाता है कि जो रोहिंग्या और बांग्लादेशी लोग भारत में आ बसे हैं उनको भी भारत में उसी तर्ज पर महत्व दिया जाता है जैसे कि भारत के मूल निवासियों को दिया जाता है।
भारत एक विकासशील देश है। इसी विकास के लिए देश के नागरिक टैक्स भरते हैं टेक्स के द्वारा ही भारत की उन जरूरतों को पूरा किया जाता है जिससे कि भारत के प्रत्येक नागरिक को जरूरी सुविधाएं दी जा सके। जैसे की स्वास्थ्य, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर परंतु इन सुविधाओं पर उन विदेशी लोगों का कोई अधिकार नहीं है जो लोग गैरकानूनी तरीके से भारत में आप बसे हैं। कुछ राजनेता अपनी राजनीतिक जमीन के लिए ऐसे लोगों को संरक्षण देते हैं। यह लोग केवल अपनी पार्टी व अपनी राजनीतिक छवि को बनाए रखने के लिए व स्वयं की महानता दर्शाने के लिए इन विदेशी घुसपैठियों के विरोध में एक शब्द भी नही बोलते हैं। इन्हीं को वोटर बनाकर अपने वोट बैंक मे बढ़ोतरी कर सत्ता में बने रहना चाहते हैं। अपने स्वार्थ के वशीभूत होकर देश के निवासियों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। भारत के संसाधनों को इन लोगों के हाथों छीनवा रहे हैं। असल मायने में इसके दोषी केवल वह राजनेता है जो देश की संपदा को इन विदेशी घुसपैठियों के हाथ लुटवा रहे हैं। यह घुसपैठिए मजबूर बनकर भारत में आते हैं और कुछ समय के बाद आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं ऐसे विदेशी घुसपैठियों को भारत मे शरण नहीं देनी चाहिए इनसे भारत का भविष्य खतरे में नजर आता है। राज्य व केंद्र सरकार को उन सभी विदेशी घुसपैठियों का आंकड़ा सार्वजनिक करना चाहिए जो लोग गैरकानूनी तरीके से भारत में रह रहे हैं जिससे कि भारत की जनता को यह पता लग सके कि उनके टैक्स का पैसा किन लोगों पर खर्च किया जा रहा है उनके संसाधनों को किन लोगों के लिए सुरक्षित किया जा रहा है।
(विक्रम गोस्वामी)
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