बेरोजगारी का मूल कारण
मानव समाज का इतिहास समस्याओं का इतिहास है मनुष्य अपने जीवन के शुरुआती काल से ही समस्याओं से टकराते आ रहा है और एक सच्चाई यह भी है कि समस्या मनुष्य के जीवन में नहीं बल्कि हर एक जीव को है जो पृथ्वी पर पल बढ़ रहा है उसके जीवन मे समस्या निरंतर बनी हुई है.
पर मनुष्य के जीवन में आज की समस्या रोटी कपड़ा और मकान की नहीं है, है भी तो आंशिक तौर पर फिर आज की बड़ी समस्या क्या है जिस से हम सब ही नहीं ब्लकि हमारी और आपकी आने वाली संततिया भी जुझेगी.
मैं अपने समान्य समझ से कहूँगा की आज की बड़ी समस्या है बेतहाशा जनसंख्या वृद्धि ज्यादा बेहतर यह होगा कि इसे जनसंख्या वृद्धि नहीं ब्लकि जनसंख्या विस्फोट कहा जाए और विस्फोट मैं विस्फोट शब्द का प्रयोग इस लिए भी कर रहा हूं क्यु भारत मे प्रति वर्ष जनसंख्या वृद्धि दर 2010 से लेकर 2019 के बीच 1.2 फीसदी बटाया गया जो इतने विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए खतरनाक है.
यह समझने वाली बात है कि हमारे पास संसाधन सीमित है और जनसंख्या असीमित हमारे पास रेल्वे ट्रैक, रोड, रोजगार, नौकरी और प्राकृतिक संसाधन सब कुछ सीमित है पर जनसंख्या असीमित.
इसके कुछ मौलिक कारण है जो मैं निम्नवत दे रहा हूं.
1. जन्म दर मे लगातर हो रही वृधि
2. कम आयु में विवाह
3. निम्न साक्षरता
4. परिवार नियोजन के प्रति विमुखता
5. रोहिंग्या व बांग्लादेशियों का अवैध रूप से आना
6. अन्य सीमा प्रांतीय देशों से शरणार्थी का भारत मे वस जाना
7. चुकी भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र मे संख्या का ही महत्व है इसलिए राजनीतिक महत्वाकांक्षा पाले कुछ धर्म विशेष के लोग दिल्ली के सफर को जनसंख्या के आधार पर ही पाना चाहते हैं.
आदि बहुत सी समस्याओं से भारत देश जूज रहा है। सीमित नौकरियां है परंतु उनको पाने के लिए असीमित लोगों की कतार लगी है इतना ही नही देश के प्रवासी मजदूर का रोजगार बंगलादेशी व रोहिंग्याओ द्वारा छीना जा रहा है।
जो भी राजनैतिक दल विपक्ष मे होता है वो सत्तापक्ष क़ो बेरोजगारी के नाम पर घेरने का काम करता है और स्वंय सत्ता मे आकर इस विषय पर फैल हो जाता है। समस्या है सब देख रहे है परन्तु समस्या के मूल कर्ण पर काम नही कर रहे है या करना नही चाहते है।
आपका अपना
विक्रम गोस्वामी
Sahi
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