बिन बाल्मीकि अधूरा सा है सनातन......
भारत वर्ष का इतिहास महर्षियों का इतिहास है जिसमें महर्षि वाल्मीकि है, वेद व्यास हैं, संत रविदास हैं और ऐसे नामों की लंबी सूची है.
जब कि हम यह जानते हैं कि सनातन का अर्थ होता है - जिसका आदि और अंत न हो अर्थात जो अनंत हो जिसका शुरूवात भी न मालूम हो और अंत भी न मालूम हो तो स्वभाविक है कि ऐसे धर्म में महर्षि वाल्मीकि से पहले भी ऋषि हुए होंगे और बाद में भी. फिर भी कुछ विशेष अर्थों में देखा जाए तो महर्षि वाल्मीकि के बगैर सनातन अधूरा सा प्रतीत होता है.
एक तो महर्षि वाल्मीकि आदिकवि है दूसरा उन्होंने अध्यात्म रामायण की रचना की चुकी इस देश में और भी बहुत रामायण लिखा गया है जैसे - तमिल भाषा में कंबन, उड़िया मे विलंका, कन्नड मे पंप और अवधि में रामचरितमानस फिर भी महर्षि वाल्मीकि का विशेष महत्व इस अर्थ में है कि उन्होंने सबसे पहले राम कथा की रचना की और शेष सभी राम कथाओं पर उनके राम कथा का प्रभाव देखा गया है. यदि वाल्मिकी कृत रामायण नहीं होता तो देश में आज किसी भी भाषा में कोई भी राम कथा नहीं होती. यहां यह भी ध्यान रखना होगा कि पूरे विश्व में महर्षि वाल्मीकि कृत अध्यात्म रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरित मानस राम कथा से संबंधित ये दो ही ऐसे महाकाव्य है जिन्हें सर्वाधिक पढ़ा जाता है.
महर्षि वाल्मीकि ने सिर्फ राम को ही नहीं अपितु जगत जननी मां सीता को भी उनके संघर्ष के दिनों में अपने कुटिया मे आश्रय देते हैं और लव-कुश जैसे मेधावी शिष्यों को शिक्षा भी देते हैं और उनको चरित्रवान भी बनाते हैं.
अतः इसमे कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए कि पारिवारिक मर्यादाओं के लिए सम्पूर्ण भारतीय साहित्य में महर्षि वाल्मीकि कृत अध्यात्म रामायण से बढ़कर श्रेष्ठ ग्रंथ पृथ्वी पर कोई नहीं है और महर्षि वाल्मीकि से श्रेष्ट कोई कवि भी. उन्होंने सारे संसार के लिए युगों-युगों तक की मानव संस्कृति की स्थापना की है और साथ ही साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार और सामाजिक महत्व के महिमा को महाकाव्य का रूप दे कर अमर किया है.
सनातन ने हर दौर में ऋषि और महर्षि दिया है और यह एक प्रबल कारण है कि जब विश्व के मानचित्र पर अनेक धर्म आए और समय के प्रवाह में बह गए तब उस कठिन काल में भी सनातन जिंदा है और फल-फूल रहा है.
हमे यह नहीं भूलना चाहिए कि जब मध्यकाल मे हर धर्म अपने अपने विचारों को प्रतिष्ठित करने के लिए रक्तपात मे विश्वाश रखने वाले योद्धा को जन्म दे रहा था तब हमारा सनातन संत दे रहा था और यह हमारे भरतवंशीयों के सहिष्णुता होने का अब तक का सबसे प्रबल उदाहरण है.
सनातन ने सदैव ही हमे संतों का सम्मान करना सिखाया जाता है ऐसे ही नहीं इस धर्म को अंकुरित करने वाली भूमि को दुनिया इतिहास में विश्व गुरु कह के प्रणाम करती रही है और यहां के संतों के चरणधुली को माथे पर तिलक के तरह सजाती रही है.
विक्रम गोस्वामी
Jai Shree Ram
ReplyDeleteBhagwan Balmiki ji ki jai ho
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जी की जीवन गाथा पर आधारित आदिकाव्य हिन्दू ग्रंथ 'रामायण' के रचयिता महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती पर सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
ReplyDelete#बलराम_झा।
#सूचना_एवम_प्रचार_मंत्री।
#सनातन_हिंदू_युवा_वाहिनी।
Jai shree ram .....
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