आप क्या हैं? आप की संगत बताती है
आप क्या हैं आप की संगत बताती है.
"संगत से गुण होत है संगत से गुण जात"
अर्थात, आप के अंदर कैसे गुण है या आप कैसे गुण सीख रहे हैं ये आप की संगत तय करती है यदि आपकी संगत अच्छी है तो आपके गुण भी अच्छे हैं और संगत अच्छी नहीं है तो गुण भी अच्छे नहीं है.
कहते हैं कि आपका गुण कैसा है ये आपकी संगत (अर्थात दोस्त) बताती है और आपकी हैसियत क्या है ये आपके दुश्मन बताते हैं यहां भी यह विचारणीय है कि हैसियत बेशक दुश्मन बताए पर गुण तो संगत से ही तय होगी.
आईए दो महाकाव्यों अर्थात रामायण और महाभारत से से दो प्रबल उदाहरण लेते हैं.
दुर्योधन का संग कर्ण को प्राप्त था और राम का संग विभीषण को प्राप्त था परंतु इतिहास साक्षी है कि कर्ण जैसा सात्विक पुरुष दुर्योधन के संगत में आकर धर्म और अधर्म मे अन्तर नहीं कर सका और अधर्म की ओर से युद्ध किया परंतु वही विभीषण जो कि रावन के साम्राज्य मे रहा परन्तु राम का संगत पा कर धर्म करते हुए धर्म की ओर से युद्ध किया और ये चरम उदाहरण है संगत से गुण होने का और नहीं होने का.
संगत में गुण देने और लेने की कितनी प्रबलता है यह इस बात से भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि कि अंगुलियाँ माल जैसे खुंखार डाकू को जब गौतम बुद्ध जैसे व्यक्तित्व वाले व्यक्ति का सानिध्य मिला तो वह दुर्दांत डाकू से सज्जन बन गया.
कहा गया है कि व्यक्ति को अपने मित्र के चुनाव करने मे विशेष ध्यान रखना चाहिए मित्रता उसी व्यक्ति से कीजिए जो आपसे गुण मे उच्च हो या आप के समकक्ष हो और पातक व्यक्ति कभी भी आपको सुंदर संगत नहीं दे सकता.
ऐसे लोगों के सदैव बचना चाहिए जो आप व्यक्तित्व पर दूषित प्रभाव डालते है।
विक्रम गोस्वामी
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