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श्रीराम के भव्य राम मंदिर निर्माण का भुमिपुजन

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सनातन हिन्दु युवा वाहिनी के सभी साथी. 5 अगस्त 2020 बुधवार को प्रातः अपने घर, दुकान, आफिस, कार्यस्थल, फेक्ट्री वगेरह जहां तक हो सके वहां पर ज्यादा से ज्यादा भगवा ध्वजारोहण करें। अपने को गोरवशाली पलों का साक्षी बनाये। हिन्दुओं हिन्दु होने के गोरव को महसूस करें। आप 500 साल की सबसे भाग्यशाली पीढ़ी हैं। जो हिन्दू स्वाभिमान की पुनर्स्थापना देखेंगे। 5 अगस्त 2020 बुधवार यह वह दिन होगा जिसदिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्मस्थान सरयू के तटअयोध्या की पावन भूमि पर भगवान श्रीराम के भव्य राम मंदिर निर्माण का भुमिपुजन होगा। हिन्दुओं की आन बान शान भगवान राम भव्य मंदिर में भव्य स्वरूप में फिर से रामराज्य की स्थापना करेंगे। कृपया आप सभी से निवेदन, अनुरोध, करता हूं कि इस पवित्र दिन को भगवा ध्वज लहराकर कर पुरे भारत वर्ष को ही नहीं पुरे विश्व को हिन्दूधर्म की शक्ति से परीचित करवा दिया जाए। जय श्री राम जय जय श्री राम। महंत श्री सुरेंद्र नाथ अवधूत जी।                               राष्ट्रीय अध्यक्ष सनातन हिंदू वाहिन...

"मनोज तिवारी जी के संघर्ष व उनके संघर्ष के साथियों को प्रणाम "

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किसी ने बहूत खूब कहा है की संघर्ष इतनी खामोशी से हो की सफलता खुद बा खुद शोर मचा दें. आज हम एक एसे ही व्यक्तिव पर चर्चा करने जा रहे है जिसने बल्ला उठाया तो बनारस विश्व विद्यालय क्रिकेट टीम के कप्तान बने, गायकी ने मृदुल नाम का सम्मान दिया, जिनके अभिनय नें बॉलीवुड के बड़े-बड़े कलाकारों को भोजपुरी के ओर मोड़ दिया,  जो आज युवाओं के राजनेतिक रोल मॉडल है वर्तमान के सांसद व पूर्व भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी.  मनोज तिवारी जी का जन्म 1 फरवरी 1971 बिहार जिला तेमूर गावं अतरबलिया मे हुआ. पिता श्री चन्द्रदेव तिवारी साधारण किसान थे उनकी रुचि शास्त्रीय संगीत मे थी गाते भी बहुत मधुर थे समाजिक बुराइयों को अपने गायन से समाज के सामने प्रस्तुत करते थे. माँ ललिता देवी गृहिणी हैं मनोज को मिला कर पांच भाई बहन सभी नें उच्च शिक्षा प्राप्त की हैं.  मनोज जी और संघर्ष का मानो चोली-दामन का साथ रहा हो, गांव में पढ़ाई की सुविधाएं न होने के कारण इंटर तक की पढ़ाई के लिए गावं से लगभग चार किलो मीटर दूर पैदल जाते थें. पिता की प्रेरणा से ही मनोज तिवारी अपनी गायकी से समाजिक बुराईयों पर ...

देश को आपदा से बचाने के लिए मंगल आरती व हनुमान चालीसा का आयोजन कर रहें सनातन हिन्दु युवा वाहिनी के कार्यकर्ता: विक्रम गोस्वामी

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 वर्तमान समय में कोरोना जैसी महामारी और विभिन्न राष्ट्रीय आपदाओं से जूझ रहे समस्त देशवासियों को छुटकारा दिलाने के लिए परम पूज्य गुरुदेव महंत श्री सुरेंद्रनाथ अवधूत जी (राष्ट्रीय अध्यक्ष) की प्रेरणा से हिंदुओं में धर्म के प्रति अलख जगाने के लिए *सनातन हिंदू युवा वाहिनी* दिल्ली प्रदेश के सदस्यों  ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र बदरपुर सुल्तानपुरी ओखला तुगलकाबाद एवं द्वारका विधानसभा क्षेत्रों में मंगल आरती एवं हनुमान चालीसा का आयोजन किया  इस बाबत महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कहा की आपदा की इस घड़ी में देश के युवा को चाहिए कि वे हर स्थिति में स्वयं को देश सेवा एवं समाज सेवा के लिए तैयार रखें उन्होंने कहा की आपदा की इस घड़ी में वह हम सब का पालनहार ही एक सहारा है जिसकी शरण में जाकर हम इस सृष्टि को बचा सकते हैं और समाज का भला कर सकते हैं इसी कड़ी में मंगल आरती और हनुमान चालीसा का आयोजन किया गया सनातन हिंदू युवा वाहिनी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विक्रम गोस्वामी ने कहा की मंगल आरती और हनुमान चालीसा को लेकर युवाओं का जोश देखने लायक था इस आयोजन की सफलता को देखते हुए हम पूरे दिल...

संगठन जरूरी है मजबूरी नहीं: विक्रम गोस्वामी

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         संघे शक्ति कलियुगे ! (अर्थात कलियुग में संगठन शक्ति ही प्रमुख है) ये श्लोक अपने अनेकों बार पढ़ा या सुना होगा. संगठन की शक्ति को जानने के लिए हमें अपने धर्म ग्रंथो को पढ़ना व सुनना चाहिए. ऐसा नहीं है की संगठन की शक्ति का महत्व केवल कलयुग मे ही है सत्युग,त्रेतायुग,द्वापरयुग मे संगठन का अपना विशेष महत्व रहा है सत्युग मे देव दानव युद्ध,त्रेतायुग मे श्री राम का रावण से युद्ध, द्वापरयुग मे कुरुक्षेत्र का युद्ध, हर युग मे सत्य ओर संगठन की विजय होती रही है और इस कलियुग मे भी सच्चाई के मार्ग पर चलने वाले संगठनों की जरूरत है. आम तौर पर देखा जाता है जब लोग संगठित होते है तो कई बार सत्य की रह छोड़ देतें है ओर कुछ समय बाद फैला हो जाते है कार्य की सफलता केवल सत्य के रह पर मिल सकती है वो भी संगठनात्मक दृष्टि से ही संभव होगी. जागो ओर संगठित रहो. जो कायर थे वो धर्म बदल चुके है हमारें पुरखे वीर थे जिन्होनें धर्म के सम्मान मे बलिदान दे दिया पर धर्म नहीं बदला  पीठ पर घात करने वाले गद्दारों को संगठित हो कर सबक सिखाया. हिन्दुओं को बाट कर हराया जा सकता है संगठि...

दिल्ली कोई सराय नहीं की कोई भी विदेशी आए और बस जाए : विक्रम गोस्वामी

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दिल्ली मे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की बढ़ती सांख्य चिंता का विषय बनती जा रही है वहीं दूसरी ओर देखें तो प्रवासी मजदूरों को दिल्ली से भगाने का काम किया जा रहा है. जिन लोगों ने दिल्ली को सजाया था उन लोगों ने पेदल चल कर हजारों मील का सफर तय किया.कुछ लोगों की चलते चलते सांस रुक गई. कुछ मंजिल तक पहुंचे पर खाली हाथ आँखों मे आँसू लिए जो रोटी की तलाश मे दिल्ली आए दिल्ली ने उनको भूखा ही भागा दिया.  ऐसा नहीं है दिल्ली का खजाना खाली हो गया है पैसा बहुत है चिंता मत करना ये बात दिल्ली के  मुख्यमंत्री के मुँह से आपने कई बार सुनी होगी. पर अब पता चला ये प्रेम देशी नहीं विदेशी है सरकार रोहिंग्या और बंगलादेशीयों को बसाने मे लगी है और अपने ही देश के प्रवासी मजदूर भाइयों को हालत का भय दिखती रही. वैश्विक महामारी के समय सनातन हिन्दु युवा वाहिनी की हर इकाई ने क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सेवा की पर कुछ नेता रोहिंग्या भक्ति मे लगे है सपनें बेंचने वाले नेता वोट बैंक की खातिर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहें है कई रिपोर्ट्स से साफ हो चुका है ये लोगा आतंकी गतिविधियों मे शामिल है आंकड़ों की...

आरक्षण v/s आरक्षण: विक्रम गोस्वामी

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                आज पूरा देश आरक्षण नाम की चिंगारी से जल रहा है हर वर्ग को इस छोटी सी चिंगारी ने झुलसा कर रख दिया है जहा देखो वाही आरक्षण के नारे सुनाई पड़ते है कही आरक्षण विरोधी नारे कही आरक्षण पाने के लिए नारे आज कल आरक्षण को ले कर बड़े बड़े आन्दोलन चल रहे है पर दूर से देख कर  समझना बहुत मुश्किल होता है इन को आरक्षण चाहिय या ये आरक्षण का विरोथ कर रहे है  आरक्षण आखिर क्या है केवल यही न की जो लोग किन्ही कारणों से पिछाड गए थे उन को साथ लेन की प्रकिर्या आज भी जिस समाज को आरक्षण दे कर सामान लेन का प्रयास किया जा रहा है उस समाज को इस का कितना लाभ मिला आप भलीभांति जानते है आरक्षण का लाभ केवल वही लोग ले रहे है जिने बैंक में मोटी रकम और घरो में लम्बी लम्बी गाड़िया है गरीब तो आज भी इस का लाभ लेने की लिए  केवल चप्पले घिस रहा है उस समय को देख कर बाबा साहब ने ये आरक्षण प्रणाली बनाई थी इस की जरुरत भी थी चंद मनुष्य मनुष्य से मनुष्य जैसा व्यवाहर नहीं कर रहे थे स्वाम को न जाने क्या समझ बैठे थे तत्कालीन अवश्यकता को देख ये  आरक्षण प्रणाल...

शिव सेना शिव भक्तों की हत्या पर मौन क्यों? विक्रम गोस्वामी

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महाराष्ट्र के पालघर और नांदेड़ मे  निर्दोष साधुओं की बेरहमी से हत्या कर दी गई। सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करने वाले उन संतों का किसी से क्या बैर रहा होगा जो स्वंय के परिवार को छोड़ समूचे राष्ट्र को अपना परिवार बनाने की रहा पर चल रहें थे   ऐसे में निरपराध साधुओं पर जानलेवा हमले किसी बड़ी राजनैतिक साजिश की और इशारा कर रहें है जिस भगवे के सम्मान मे हिन्दुत्व के बब्बर शेर बाला साहब ठाकरे लगे रहते थे जिनका जीवन भगवे को समर्पित था आज उनकी ही पार्टी महाराष्ट्र मे सत्ता मे है पर साधु संत असुरक्षित है  दोनों घटनाओं पर नजर डालें तो ऐसा लगता है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। कानून का डर न होने की वजह से अपराधी बेखौफ वारदात को अंजाम दे रहे हैं। साधु-संतों की हितैषी होने का दावा करने वाली शिवसेना अपनी ही सरकार में साधुओं की हत्या पर लगाम नहीं लगा पा रही है। इस मामले में सामुदायिक दृष्टिकोण से न देखें तब भी एक नागरिक के बतौर साधु संतों व आम जनता की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी, जिस पर राज्य सरकार बुरी तरह फेल होती नजर आ रही है।