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अखंड-मंडलाकारं व्याप्तम येन चराचरम,तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः।।

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जन्म जन्मांतर के पापों का क्षरण करने वाले, अपनी वाणी के सहज माधुर्य से अगणित श्रोताओं के हृदय में श्री हरि के गुणों की दिव्य प्रतिमूर्ति स्थापित करने वाले, परम पूज्य गुरुदेव आनंदपीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अनंत श्री विभूषित श्री श्री 1008 स्वामी श्री बालकानंद गिरि जी "महाराज श्री" के राजधानी दिल्ली स्थित पावन आश्रम श्री हरिधाम मंदिर का जीर्णोद्धार एवं गुरु कुटीर का उद्घाटन कार्यक्रम गुरु मां वात्सल्य की मूर्ति, मूर्धन्य विदुषी, दीदी मां मंजू श्री ज्योतिषाचार्य के आयोजकत्व में विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ।  कार्यक्रम आरम्भ - "महाराज श्री" द्वारा कार्यक्रम का आरम्भ दैहिक दैविक भौतिक तीनों तापों से परे त्रिकाल के दृष्टा भगवान् महाकाल के वेद वर्णित रुद्राष्टाध्याय्यी के पाठ द्वारा रुद्राभिषेक से किया गया,तदुपरांत भगवान् देव की आरती के पश्चात् पूजन मगंलपूर्वक संपन्न हुआ।   सुन्दरकाण्ड पाठ- रुद्राभिषेक के पश्चात्  श्री सुन्दरकाण्ड पाठ का संगीतमय आयोजन हुआ। महाराज श्री के निर्देशन में "नूपुर संगीत परिवार" के शास्त्रीय गायक एवं गायिकाओं ने श्री सुन...

मुलेठी के लाभ सभी तक पहुंचायें

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आप स्वस्थ हों देश स्वस्थ हो और साथ ही अपना व देश का करोड़ों रुपये बचायें मुलेठी के हैं ढेर सारे लाभ– मुलेठी का परिचय  मुलेठी एक गुणकारी जड़ी बूटी है। आमतौर पर लोग इसका इस्तेमाल सर्दी-जुकाम या खांसी में आराम पाने के लिए करते हैं। गले की खराश में इसका उपयोग करना सबसे ज्यादा असरदार होता है। हालांकि मुलेठी के फायदे  सिर्फ इतने ही नहीं हैं बल्कि इसका मुख्य इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने में किया जाता है। इस लेख में हम आपको मुलेठी के फायदे, नुकसान और सेवन के तरीकों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। मुलेठी के फायदों के बारे में  जानने से पहले ये जानना ज़रूरी है कि असल में मुलेठी है क्या मुलेठी के लाभ 1 मुलेठी क्या है?  2 अन्य भाषाओं में मुलेठी के नाम 3 मुलेठी के फायदे और सेवन का तरीका 3.1 सिरदर्द से आराम  3.2 मुलेठी के फायदे बाल बढ़ाने में 3.3 मुलेठी के फायदे: माइग्रेन के दर्द   3.4 मुलेठी के फायदे: बालों के सफ़ेद होने से रोकथाम  3.5 मुलेठी के फायदे: आंखों के रोगों में  3.6 मुलेठी के फायदे: कंजक्टीवाइटिस या आंख आना   3.7 मुलेठ...

धर्म

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धर्म  समय के साथ-साथ जब लोग बदलने लगे तो समझ लो आप का समय भी बदल रहा है और बदलाव ही प्रकृति का नियम भी है। प्रकृति से सीखना चाहियें। वसंत ऋतु मे पेड़ पौधे, बाग बगीचे, खेत खलियान हरे भरे होते है वहीं शरद ऋतु मे हरे भरे पेड़ भी अपने पत्तों को स्वयं ही अपने से दूर कर देते है। क्योंकि नया तब तक संभव नहीं है जब तक पुराने से मोह भंग ना हो। इसमे मैं किसी को छोड़ने के विषय मे बात नहीं कर रहा हूँ क्योंकि जिसे आपने सही से पकड़ा ही नहीं है उसे छोड़ा कैसे जा सकता हैं। कहीं ऐसा तो नहीं की आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी को अपना बनाते हो और छोड़ते हो। ये कथन किसी एक व्यक्ति या समूह  के लिए नहीं अपितु समस्त सांसारिक प्राणियों के लिए है। धर्म, समाज, रिश्ते, सभी हमारी सुविधा के अनुसार ही होते है। क्या हम पूर्णरूप से धर्म के नियमों के अनुसार चलते हैं, क्या हम सही से अपने सामाजिक कार्य कर पा रहे हैं? क्या हम अपने रिश्तों के साथ पूरी तरहा न्याय कर पा रहे हैं? अगर नहीं तो जान लो धर्म समाज और रिश्ते के संचालक आप हो।  आप धर्म और समाज के अनुसार नहीं बल्कि आप अपने अनुसार सभी को चलाते हो वो भी...

महाभारत मेरी दृष्टि से

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Mahabharat Meri Drishti Se महाभारत मेरी दृष्टि से ये पुस्तक मेरा प्रथम प्रयास है शिक्षाप्रद ये पुस्तक मानव जीवन मे हो रही घटनाओं को इतिहास से जोड़ती है व उनके द्वारा किये जा रहे कार्य को शुभ और अशुभ परिणामों के लिए सचेत करती है ये पुस्तक आप को अवगत कराती है क्या सही है और क्या गलत है वर्तमान मे जो आप कर रहे हो उसका क्या परिणाम होगा। इस महाकाव्य से बहुत कुछ सीखा जा सकता है जो कुछ भी आज आप के जीवन मे घटित हो रहा है उसका समाधान तो भगवान श्री कृष्ण ने आज से लगभग 5000 वर्ष पूर्व ही कुरुक्षेत्र मे दे दिया था। उस ज्ञान की गाथा का नाम भगवत गीता है जो की महाभारत का एक भाग है, महाभारत मे हर वो पात्र है जो आपके आस पास है या ये कहिये की महाभारत के सभी पात्र आप के आसपास है कोई अधिक शांत स्वभाव का व्यक्ति है, कोई अहंकारी है, कोई मौन है, किसी का किरदार धैर्यवान है, कोई ज्ञानी है, कोई षड्यंत्रकारी है, किसी को आप से ईर्ष्या हैं, कोई आपका हक़ मारना चाहता है, कोई निस्वार्थ आपके साथ है, कोई आप का होकर भी आपका नहीं है, कोई सच्चा मित्र है, और आप भी इनमे से एक हो। एक ऐसी भी धारणा है अधिकां...

"नकल से नहीं अकल से करो तनाव मुक्त रहोगे"

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"नकल से नहीं अकल से करो तनाव मुक्त रहोगे" आपने अपने आसपास देखा होगा कुछ लोग दूसरों की होड करने में अपना नुकसान कर बैठते हैं कभी-कभी नकल के चक्कर में अपने पास जो होता है उसे भी गवा देते हैं एक आदमी ने पड़ोसी को देखकर उसके ही जैसा बड़ा सा मकान बनाने के लिए कर्जा लिया और उससे भी सुंदर सा एक मकान बना दिया। कुछ समय के उपरांत बच्चों ने अपने पिता को घर से निकाल दिया कहा कर्जा लिया है तुमने तो तुम्हें ही चुकाना होग। हमने नहीं कहा था कर्जा लेकर इतना बड़ा मकान बनाओ। उसकी तो बड़ी-बड़ी मिले चलती हैं और तुम्हारे पास क्या है. क्या सोच कर इतना बड़ा मकान बनाया था। मकान बनाने के लिए कितना खर्चा ले लिया। जिन के लिए बड़ा सा महल जैसा मकान बनाया आज वह महल के अंदर और जिसने बनवाया वो घर से बाहर है।  किसी की होड़ करना भी इंसान को कई बार नीचा दिखा देता है व्यक्ति किसी से चीज मांग कर पहन तो लेता है परंतु गुम हो गई. तो फिर बड़ा तनाव झेलना पड़ता है। जो आपके पास है उतने में ही संतोष रखा ले तो आदमी तनाव से मुक्त रह सकता है। लेकिन व्यक्ति दूसरों की ऐसो आराम की चीज को देखकर रिस कर बैठता है और उस...

"शंकराचार्य का जीवन दर्शन"

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"शंकराचार्य का जीवन दर्शन"                               सनातन पर आए खतरे को देख हाथ मे दण्ड लिए पूरे देश का भ्रमण कर चार पीठों की स्थापना करने वाले आदि गुरु शंकराचार्य जी का धर्म के प्रति समर्पण ही सनातनधर्मियों को ऊर्जा प्रदान करता है। संत परम्परा के महान संत आदि गुरु शंकराचार्य जी को भगवान महादेव का अवतार माना जाता है। ऐसे समय उनका प्रादुर्भाव हुआ जब मठ मन्दिर व्यभिचार के केन्द्र बनाते जा रहे थे। धार्मिक क्षेत्रों से सदाचार लुप्त होता जा रहा था। नर बलि, पशु बलि, अंधविश्वास चर्म पर था। सन् 788 मे ग्राम कालडी केरल मे शिवगुरू व आर्यम्बिका के घर हुआ। तीन वर्ष की अवस्था होते होते उनके पति का देहावसान हो गया। तमिलियन होते हुए उन्होने संस्कृत व गणित मे महारत हासिल की वेदों,धर्म ग्रंथों का ज्ञान अर्जित किया मात्र 2 वर्ष की आयु मे गीता, रामायण, वेदों का कंठस्थ होना धार्मिक उपदेश देना व 8 वर्ष  की आयु मे वैराग्य लेना किसी दैवीय शक्ति से कम नही था। जब वहा भ्रमण के लिए निकले तो थक के एक वृक्ष के...

"क्रोध और विरोध जरूरी है"

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"क्रोध और विरोध जरूरी है" पितामह भीष्म जब भूलोक का कालचक्र पूरा कर स्वर्ग पहुँचे, अपना स्थान जटायु से नीचे देख अपने स्वभाव के अनुरूप पितामह क्रोधित हो गए और चित्रगुप्त जी से बोले मैं गंगापुत्र भीष्म, भगवान परशुराम का शिष्य, अटल प्रतिज्ञा का उद्घोषक, महारथियों का पितामह आपने मेरा स्थान एक मांस भक्षी पक्षी के नीचे रखा है। चित्रगुप्त जी मुस्कुराते हुए बोले, पितामह  जानता हूँ कि आप पराक्रमी, बुद्धिमान, व प्रतिज्ञा का पालन करने वाले हो। परंतु आप उस समय मौन व तटस्थ रहे जब आप को  विरोध करना चाहिये था। पांचाली का चीर हरण हो रहा था तब आपको क्रोध नहीं आया आप जैसा महापराक्रमी, ज्ञानी एक नारी के चीरहरण पर मौन रहा।  लेकिन जब माता सीता का हरण कर रावण ले जा रहा था, तो ये कमजोर पक्षी एक नारी के सम्मान के लिए शक्तिशाली, मायावी रावण से भीड़ गया और लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ। जटायु ने समय पर क्रोध किया और गंगापुत्र आप समय पर विरोध भी न कर सके। इसलिए जटायु का स्थान आपके स्थान से ऊँचा हो गया। शिक्षा: देश,धर्म, व समाज और स्वाभिमान का जब कोई चीर हरण की कोशिश करें तो क्रोध स्वाभा...