कालकाजी मन्दिर दिल्ली


कालकाजी मंदिर अरावली पर्वत श्रृंखला के सूर्यकूट पर्वत पर स्थित है इस मन्दिर को मनोकामना सिद्धपीठ मन्दिर भी कहा जाता है। माँ कालिका का ये मन्दिर देश के प्राचीनतम सिद्धपीठों में से एक है। 

इस पीठ का अस्तित्व अनादि काल से है। मान्यता है कि इस ही स्थान पर आद्यशक्ति महाकाली के रूप में प्रकट हुई। और असुरों का संहार किया। माँ पार्वती ने कौशिकी देवी को प्रकट किया। जिन्होंने अनेक असुरों का संहार किया लेकिन रक्तबीज को नहीं मार सकीं। तब माँ पार्वती ने अपनी भृकुटी से महाकाली को प्रकट किया। जिन्होंने रक्तबीज का संहार किया। महाकाली का रूप देखकर सभी भयभीत हो गए। देवताओं ने माँ काली की स्तुति की तो माँ भगवती काली ने कहा जो भी इस स्थान पर श्रृद्धाभाव से पूजा करेगा, उसकी मनोकामना पूर्ण होगी। तब से ही यह मनोकामना सिद्धपीठ के रूप में विख्यात है। 
एक कथा ये भी इस मन्दिर से जुड़ी है।  महाभारत काल में युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के साथ यहां भगवती महाकाली की अराधना की थी। मुख्य मंदिर में 12 द्वार हैं, जो 12 राशियों का संकेत देते हैं। वहीं परिक्रमा स्थल के 36 दरवाजे हैं। यह मंदिर पूरी तरह वास्तु के आधार पर बना है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ग्रहण में सभी ग्रह इसके अधीन होते हैं। यही वजह है कि ग्रहण के दौरान जहां दुनिया भर के मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं, यह मंदिर खुला रहता है। 
मंदिर में जिस बकरे की बलि चढ़ाई जाती है, उसकी जान नहीं ली जाती। दरअसल होता यूं है कि बलि चढ़ाते समय माता की मूर्ति के सामने ही पुजारी चावल के कुछ दाने या पुष्प माँ की मूर्ति को स्पर्श करवाने के बाद बकरे के उपर फेंकता है। जिसके बाद ऐसा प्रतीत होता है मानो बकरा बेहोश सा हो गया हो जैसे उस में प्राण ही न बचे हों। परंतु कुछ ही समय के बाद फिर इसी प्रकार जब दोबारा बकरे पर चावल फेंके जाते हैं व बकरा उठ जाता है। मान्यता है कि बलि चढ़ाने की इस क्रिया के पूरे होने के बाद बकरे को छोड़ दिया जाता है।
नवरात्र में यहां रोजाना हजारों लोग माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। नवरात्र से एक दिन पहले लोग मंदिर से माता की जोत लेने आते है। मान्यता है कि अष्टमी व नवमी को माता मेले में घूमती हैं। इसलिए अष्टमी के दिन सुबह की आरती के बाद कपाट खोल दिया जाता है। दो दिन आरती नहीं होती। दसवीं को आरती होती है।
आम दिनों मे मन्दिर का समय
04:00 पूर्वाह्न से 11:30 पूर्वाह्न तक
दोपहर 12:00 से दोपहर 03:00 बजे
शाम 4:00 बजे से 11:30 बजे तक

आरती का समय
सुबह: 06:00 बजे से 07:30 बजे (शीतकालीन) शाम: 06:30 अपराह्न से 08:00 बजे (शीतकालीन)
सुबह: 05:00 बजे से 06:30 बजे (ग्रीष्म)
शाम: 07:00 बजे से 08:30 बजे  (ग्रीष्म)

अगले भाग मे माँ कालका के मन्दिर मे हुए चमत्कार व भक्तों के जीवन मे हुए चमत्कारों पर चर्चा करेंगे।

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