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सरकार पुजारियो ओर मोलवियों में फर्क कर रही है:विक्रम गोस्वामी

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दुनिया इस वक्त कोरोना के कहर से जूझ रही है ओर यह महामारी वैश्विक तोर पर फैल रही है ऐसे में लोगो में डर का माहौल है वही एक ओर  देश मेंं जहाँ एक तरफ कोविड़ 19 ने  जिस कदर कहर ढाया है उसका मुख्य कारण मरकज से निकले हज़ारो जमातियों का कोरोना को देेेश भर में लाने फैलाने के प्रकरण से देश मे अलग माहौल बना हुआ है वही मन्दिरो से हाल ही में सोना लेने की बात को लेकर हिन्दुओ के धर्मगुरु ओर हिन्दुओ के संगठन नाराज है इसी बात को लेकर सनातन हिन्दू युवा वाहिनी दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष विक्रम गोस्वामी ने  कहा कि हिन्दुओ को ही हमेशा ही टारगेट किया जाता रहा मंदिरो से सोना मांगने की बात हो या कुछ और मुद्दा यह हमेशा चलता रहा है  पर पुजारियों और मौलवियों मे सरकार फर्क डाल रही है वह सरासर गलत है जब मौलवियों को तनख्वाह दी जा सकती है तो पुजारियों  को क्यू नही  उनके साथ सौतेला रवैया किस लिए....सरकार दोनों को दो अलग अलग चश्में से देखती है इन दिनो सभी मंदिर बंद थे दिल्ली मे हर कॉलोनी मे दो या चार मंदिर है उनमें पूजा करने वाले पुजारी और उनके परिवार पर सुध लेने वाला कोई नही है ल...

"भारतीय जनता पार्टी का इतिहास"

21अक्टूबर 1951 में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना  की। 1952 में पहली बार देश मे आम चुनाव हुए। इस चुनाव में जनसंघ ने भी हिस्सा लिया और तीन सीटें जीतीं। इस जीत के बाद भारतीय जनसंघ राष्ट्रीय पार्टी के रूप में उभर कर सामने आई।  देश के पहले लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस ने 364 सीटें जीत कर बहुमत प्राप्त कर लिया. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 सीटें जीत कर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई। आचार्य नरेंद्र देव, जयप्रकाश नारायण और डॉ. राम मनोहर लोहिया के नेतृत्व वाली सोशलिस्ट पार्टी को 12 सीट, आचार्य जेबी कृपलानी के नेतृत्व वाली किसान मजदूर प्रजा पार्टी को 9 सीट, हिंदू महासभा को 4 सीट, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ को केवल 3 सीट से संतोष करना पड़ा। रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी को भी 3 सीट मिली। बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की शिड्यूल कास्ट फेडरेशन को 2 सीटें मिलीं. 23 जून 1953 को जम्मू के जेल मे ड्रा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की रहस्यमय ढंग से मृत्यु हो गई 1954 मे मौलि चन्द्र शर्मा को  भारतीय जनसंघ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।  सन 1957 के दूसरे लोकस...

"दिल्ली का राजनैतिक इतिहास"

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भारत की आजादी के बाद देश मे राजनैतिक सरगर्मी बढ़ गई थी. आजादी के बाद दिल्ली को पार्ट-सी स्टेट का दर्जा दिया गया था। दिल्ली मे लम्बे समय तक नगरपालिका प्रशासन मे रही।   वो ही सरकार की भूमिका मे थी। चीफ कमीशनर इसके सर्वेसर्वा होते थे। नगरपालिका के अन्तर्गत 7 मार्च 1952 मे दिल्ली विधानसभा निर्वाचित हुई। मंत्रिपरिषद का नेतृत्व चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने किया।  इस तरह चौधरी ब्रह्म प्रकाश दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री हुए। ब्रह्म प्रकाश दिल्ली के शकूरपुर गावं के निवासी थे। उस समय विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या 48 थी।  सन 1955 मे दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप मे गुरुमुख निहाल सिह को नियुक्त किया गया। एक साल बाद ही दिल्ली की विधानसभा की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया और नवंबर 1956 मे दिल्ली को पावर सी स्टेट का दर्जा मिल गया।  जिससे दिल्ली राष्ट्रपति के शासन के दायरे मे आ गई। और फिर राज्य पुनर्गठन की सिफारिशे आना शुरू हुई। सन 1957 मे म्यूनिसिपिल एक्ट बनाया गया।  इसके आने के बाद दिल्ली मे मेट्रोपोलिटन काउंसिल बनी और लम्बे समय तक दिल्ली इस मेट्रोपोलिटन काउंस...

आप भी बन सकते हो धनवान

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आप भी बन सकते हो धनवान  मानव जब से सभ्य हुआ अर्थात यूँ कहें कि वह जब से कबीलाई समाज से पृथक हो कर समाज में सामुहिक रूप से रहने लगा तब से उसके जीवन में अर्थ का अर्थात धन का महत्व किसी न किसी दृष्टि से बना हुआ है. तमाम कारणों मे से एक प्रमुख कारण अर्थ भी है जो समाज में वर्ग संघर्ष का कारण बना हुआ है और आज की स्वीकृत सामाजिक मान्यता के अनुसार धन ही आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा तय कर रही है.  तो फिर हम भी अमीर कैसे बन सकते हैं आइए इस पर विचार करे.  हम सब अपने जीवन में कुछ न कुछ कार्य करते हैं और पैसा कमाते हैं जिस से की हमारा जीवन बेहतर चले और हमारे परिवार का भी. जिसमें से अधिकतर लोग अधिक पैसा कमाने की नहीं सोचते ब्लकि अधिक से अधिक पैसा बचाने की सोचते हैं और यहीं अपने मूल उद्येश्य से भटक जाते हैं. हमे पैसे बचाने से अधिक कमाने के विषय में सोचना चाहिए क्यु की हम जानते हैं कि तालाब अपना पानी बचा कर रखता है आगे नहीं जाने देता परंतु समय के साथ वह खराब हो जाता परंतु नदी अपनी पानी नहीं रोकती वह अपने प्रवाह को बनाए रखती है फिर भी उसका पानी साफ़ भी रहता है इसका यही कारण है कि नद...

बिन बाल्मीकि अधूरा सा है सनातन......

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भारत वर्ष का इतिहास महर्षियों का इतिहास है जिसमें महर्षि वाल्मीकि है, वेद व्यास हैं, संत रविदास हैं और ऐसे नामों की लंबी सूची है. जब कि हम यह जानते हैं कि सनातन का अर्थ होता है - जिसका आदि और अंत न हो अर्थात जो अनंत हो जिसका शुरूवात भी न मालूम हो और अंत भी न मालूम हो तो स्वभाविक है कि ऐसे धर्म में महर्षि वाल्मीकि से पहले भी ऋषि हुए होंगे और बाद में भी. फिर भी कुछ विशेष अर्थों में देखा जाए तो महर्षि वाल्मीकि के बगैर सनातन अधूरा सा प्रतीत होता है. एक तो महर्षि वाल्मीकि आदिकवि है दूसरा उन्होंने अध्यात्म रामायण की रचना की चुकी इस देश में और भी बहुत रामायण लिखा गया है जैसे - तमिल भाषा में कंबन, उड़िया मे विलंका, कन्नड मे पंप और अवधि में रामचरितमानस फिर भी महर्षि वाल्मीकि का विशेष महत्व इस अर्थ में है कि उन्होंने सबसे पहले राम कथा की रचना की और शेष सभी राम कथाओं पर उनके राम कथा का प्रभाव देखा गया है. यदि वाल्मिकी कृत रामायण नहीं होता तो देश में आज किसी भी भाषा में कोई भी राम कथा नहीं होती. यहां यह भी ध्यान रखना होगा कि पूरे विश्व में महर्षि वाल्मीकि कृत अध्यात्म रामायण और गोस्वाम...

आप क्या हैं? आप की संगत बताती है

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आप क्या हैं आप की संगत बताती है. भक्ति आंदोलन के परिणाम स्वरुप जन्मे रहीम ने कभी कहा था कि..... "संगत से गुण होत है संगत से गुण जात" अर्थात, आप के अंदर कैसे गुण है या आप कैसे गुण सीख रहे हैं ये आप की संगत तय करती है यदि आपकी संगत अच्छी है तो आपके गुण भी अच्छे हैं और संगत अच्छी नहीं है तो गुण भी अच्छे नहीं है. कहते हैं कि आपका गुण कैसा है ये आपकी संगत (अर्थात दोस्त) बताती है और आपकी हैसियत क्या है ये आपके दुश्मन बताते हैं यहां भी यह विचारणीय है कि हैसियत बेशक दुश्मन बताए पर गुण तो संगत से ही तय होगी. आईए दो महाकाव्यों अर्थात रामायण और महाभारत से से दो प्रबल उदाहरण लेते हैं.  दुर्योधन का संग कर्ण को प्राप्त था और राम का संग विभीषण को प्राप्त था परंतु इतिहास साक्षी है कि कर्ण जैसा सात्विक पुरुष दुर्योधन के संगत में आकर धर्म और अधर्म मे अन्तर नहीं कर सका और अधर्म की ओर से युद्ध किया परंतु वही विभीषण जो कि रावन के साम्राज्य मे रहा परन्तु राम का संगत पा कर धर्म  करते हुए धर्म की ओर से युद्ध किया और ये चरम उदाहरण है संगत से गुण होने का और नहीं होने का.  संगत में गुण ...

बेरोजगारी का मूल कारण

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मानव समाज का इतिहास समस्याओं का इतिहास है मनुष्य अपने जीवन के शुरुआती काल से ही समस्याओं से टकराते आ रहा है और एक सच्चाई यह भी है कि समस्या मनुष्य के जीवन में नहीं बल्कि हर एक जीव को है जो पृथ्वी पर पल बढ़ रहा है उसके जीवन मे समस्या निरंतर बनी हुई है. पर मनुष्य के जीवन में आज की समस्या रोटी कपड़ा और मकान की नहीं है, है भी तो आंशिक तौर पर फिर आज की बड़ी समस्या क्या है जिस से हम सब ही नहीं ब्लकि हमारी और आपकी आने वाली संततिया भी जुझेगी. मैं अपने समान्य समझ से कहूँगा की आज की बड़ी समस्या है बेतहाशा जनसंख्या वृद्धि ज्यादा बेहतर यह होगा कि इसे जनसंख्या वृद्धि नहीं ब्लकि जनसंख्या विस्फोट कहा जाए और विस्फोट मैं विस्फोट शब्द का प्रयोग इस लिए भी कर रहा हूं क्यु भारत मे प्रति वर्ष जनसंख्या वृद्धि दर 2010 से लेकर 2019 के बीच 1.2 फीसदी बटाया गया जो इतने विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए खतरनाक है.  यह समझने वाली बात है कि हमारे पास संसाधन सीमित है और जनसंख्या असीमित हमारे पास रेल्वे ट्रैक, रोड, रोजगार, नौकरी और प्राकृतिक संसाधन सब कुछ सीमित है पर जनसंख्या असीमित.  इसक...